Prayagraj Magh Mela 2026: माघ मेले में आस्था का सैलाब, 5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

प्रयागराज में माघ मेला 2026 ने इतिहास रच दिया। मौनी अमावस्या पर संगम तट पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ा, जिससे पुराने सभी रिकॉर्ड टूट गए और त्रिवेणी की रेती पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

Prayagraj Magh Mela 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 20, 2026

Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 ने इस बार इतिहास रच दिया। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर संगम तट पर आस्था का ऐसा विराट दृश्य देखने को मिला जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। रविवार को त्रिवेणी की रेती पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा और हर ओर केवल भक्त ही नजर आए। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मौनी अमावस्या पर लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य स्नान किया। यह संख्या प्रशासन के अनुमान से कहीं अधिक रही और इसे अब तक का सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जा रहा है।

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ऐतिहासिक स्नान पर्व

Magh Mela 2026
माघ मेले में आस्था का सैलाब

पिछले महाकुंभ और माघ मेलों की तुलना में इस बार का स्नान ऐतिहासिक रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार—

18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या, माघ मेला): करीब 5 करोड़ श्रद्धालु

28 जनवरी 2025 (महाकुंभ): 10 करोड़ श्रद्धालु

9 फरवरी 2024 (माघ मेला): 2.18 करोड़ श्रद्धालु

4 फरवरी 2019 (अर्धकुंभ): 5 करोड़ श्रद्धालु

27 जनवरी 2017 (माघ मेला): 2 करोड़ श्रद्धालु

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस बार का स्नान पर्व अभूतपूर्व रहा और श्रद्धालुओं की संख्या ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।

रेलवे स्टेशनों पर मिली राहत

स्नान पर्व के सकुशल संपन्न होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने भीड़ के कारण लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा लिया। प्रयागराज जंक्शन, छिवकी, सूबेदारगंज और नैनी जंक्शन पर अब यात्री सामान्य रूप से आवाजाही कर सकते हैं। इससे पहले 17 से 20 जनवरी तक ‘वन-वे’ प्रवेश व्यवस्था लागू थी, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

शंकराचार्य विवाद और प्रशासन की सफाई

Prayagraj Magh Mela 2026
माघ मेले में आस्था का सैलाब

मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। प्रशासन ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि शंकराचार्य ने बिना अनुमति और प्रोटोकॉल के सैकड़ों अनुयायियों के साथ बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के अनुसार उन्हें विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता था। प्रशासन ने बताया कि सुरक्षा कारणों से उनसे पालकी से उतरकर पैदल स्नान करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन वे वापस लौट गए। प्रशासन ने उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कानूनी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।

सनातनी किन्नर अखाड़े का विस्तार

माघ मेले में इस बार सनातनी किन्नर अखाड़ा विशेष आकर्षण का केंद्र बना। नवंबर 2025 में गठित इस नए अखाड़े ने सोमवार को अपनी शक्ति का विस्तार किया। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्या नंद गिरी (टीना मां) ने 6 नए महामंडलेश्वर और 4 महंतों का पट्टाभिषेक किया। इस अखाड़े ने न केवल किन्नरों को बल्कि महिलाओं और पुरुषों को भी जिम्मेदारी सौंपी। इस अवसर पर टीना मां का अनाज और सिक्कों से ‘तुलादान’ किया गया। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त पदाधिकारी सनातन धर्म के प्रचार और ‘हिंदू राष्ट्र’ के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही उन्होंने बीएमसी चुनावों में बीजेपी की जीत पर खुशी भी जताई।

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