Form 6 New Voters : फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, सीजेआई बोले- संशोधन को हमने मंजूरी नहीं दी

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर विवाद के बीच सीजेआई सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी। अदालत अब रिकॉर्ड की जांच करेगी और बदलाव करने वाले व्यक्ति की जानकारी मांगी जा सकती है। इस बयान के बाद मामला फिर चर्चा में है।

Form 6 New Voters

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

Form 6 New Voters : वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिफाइड रिवीजन (SIR) को लेकर जितना विवाद हुआ है, नए वोटरों को रजिस्टर करने के लिए फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी उतना ही विवाद हुआ है। इस बारे में 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने उस घोषणा को सही ठहराया है जो वोटरों को फॉर्म 6 एप्लीकेशन के साथ जमा करनी होती थी। इस बार, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के बयान पर सवाल उठाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी। सुप्रीम कोर्ट यह भी जानना चाहता था कि बदलाव को किसने मंजूरी दी थी।

फॉर्म 6 को लेवकर विवाद

नए वोटरों ने फॉर्म 6 का इस्तेमाल करके वोटर लिस्ट में अपना नाम रजिस्टर करने के लिए अप्लाई किया था। इस बार, SIR के दौरान, नए वोटरों को फॉर्म 6 के साथ दिए गए एडिशनल घोषणा फॉर्म में यह बताना पड़ा कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR में था या नहीं। इससे विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगाया गया कि इससे वैलिड वोटर बाहर हो सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्शन कमिश्नर सुखविंदर सिंह संधू ने चेतावनी दी थी कि सरकार के इस बारे में रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 में बदलाव करने से पहले फ़ॉर्म में बदलाव करना सही नहीं होगा।

फ़ॉर्म 6 में बदलाव गैर-कानूनी

कानून के मुताबिक बिना बदलाव किए यह फ़ैसला नहीं लिया जा सकता। लेकिन कहा जाता है कि उस चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू ने फ़ॉर्म 6 में बदलाव को “अनऑथराइज़्ड और गैर-कानूनी” बताते हुए इस पर एतराज़ जताया था और इसे वापस लेने को कहा था। 26 सितंबर को एक बयान में, कमीशन ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उस घोषणा को सही ठहराया था जिसे वोटरों को फ़ॉर्म 6 एप्लीकेशन के साथ जमा करना होता है। SIR प्रोसेस के अलावा दूसरे समय पर वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए, रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के मुताबिक नॉर्मल फ़ॉर्म का इस्तेमाल करना होता है।

फ़ॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं

सोमवार को, चीफ़ जस्टिस कांत ने सवाल उठाते हुए कहा, “हमने बदले हुए फ़ॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी है। इसे साफ़ करने की ज़रूरत है।” जिसके बाद उन्होंने कहा, “जब डॉक्यूमेंट्स जमा किए जाएंगे, तो हम देखना चाहते हैं कि यह किसने किया।” विपक्षी नेताओं ने इस पर मज़ाक उड़ाया है। MP अभिषेक बनर्जी ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट करके पूछा, “देश को कौन गुमराह कर रहा है? यह झगड़ा हमारे देश के दिल तक फैल गया है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि वोट चुराए गए हैं।

13 करोड़ वोटर्स के नाम काटने का आरोप 

सुप्रीम कोर्ट ने यह बात पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी के फाइल किए गए एक केस में कही। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले कमीशन के फैसले लेने के प्रोसेस पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक केस फाइल किया गया था। मामलों के सुलझने तक ज्ञानेश को सस्पेंड करने की मांग करते हुए एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन भी फाइल की गई थी।

SIR फेज में करीब 13 करोड़ वोटर्स के नाम छूटने के आरोपों की जांच के लिए ज्यूडिशियल इंक्वायरी कमीशन या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाने के लिए भी कोर्ट में एक अर्जी फाइल की गई थी। इससे जुड़े मामले सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच में सुनवाई के लिए आए। टॉप कोर्ट ने जांच अर्जी के मद्देनजर केंद्र से बयान मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और इलेक्शन कमीशन को नोटिस जारी किया है।

देश भर में राजनीतिक हंगामा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR से जुड़े कई फैसले दो इलेक्शन कमिश्नरों की आपत्तियों को नज़रअंदाज़ करके लिए गए। यह रिपोर्ट देश भर में राजनीतिक हंगामा है। ज्ञानेश के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोर्ट किसी अखबार की रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकता।कोर्ट ने कहा, “एक न्यूज़ रिपोर्ट 100 परसेंट सही, थोड़ी सही या गलत हो सकती है, इसलिए कोर्ट इस समय उसके आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकता। हम निश्चित रूप से उनका (कमीशन का) जवाब मांगेंगे। अगर हम देखते हैं कि किसी भी मामले में कानून का पालन नहीं किया गया है, तो हम उसे कैंसल कर सकते हैं।”

कोर्ट ने आज ज्ञानेश को सस्पेंड करने के लिए दायर अर्जी पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। उस दिन चीफ जस्टिस की बेंच ने कमीशन को नोटिस भेजने का निर्देश दिया था और कहा था, “अगर नोटिस के बाद यह पाया जाता है कि कोई फैसला एकमत से नहीं लिया गया, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे। यह नहीं माना जा सकता कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए थे।”