Prateek Yadav Death: उत्तर प्रदेश के सबसे रसूखदार ‘मुलायम कुनबे’ के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 वर्ष की आयु में निधन एक ऐसी खबर है जिसने सबको झकझोर दिया है। प्रतीक यादव भले ही राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे, लेकिन उनकी निजी जिंदगी, खासकर पत्नी अपर्णा यादव के साथ उनके रिश्तों की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। स्कूल के दिनों से शुरू हुआ यह प्रेम संबंध शादी की दहलीज तक पहुंचा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक विचारधारा और व्यक्तिगत मतभेदों के कारण इस रिश्ते ने कई कड़े इम्तिहान देखे।
स्कूल के दिनों की मोहब्बत और शाही शादी का सफर
बताते चले कि, प्रतीक यादव और अपर्णा बिष्ट के रिश्तों की शुरुआत स्कूल के दिनों में हुई थी। एक वरिष्ठ पत्रकार की बेटी अपर्णा और मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक का यह साथ करीब 8-9 सालों तक चला। लंबी डेटिंग के बाद साल 2011 में इस जोड़े की सगाई हुई और 2012 में एक बेहद भव्य और शाही समारोह में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। शुरुआती सालों में दोनों को एक आदर्श जोड़े के रूप में देखा जाता था, जहाँ प्रतीक अपने बिजनेस में व्यस्त थे और अपर्णा सामाजिक कार्यों में।
सोशल मीडिया पर ‘तलाक’ का पोस्ट
प्रतीक यादव ने कुछ समय पहले अपने इंस्टाग्राम पोस्ट से तब तहलका मचा दिया था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपर्णा यादव से तलाक लेने का ऐलान किया। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘परिवार तोड़ने वाली’ और ‘स्वार्थी’ तक कह दिया था। प्रतीक ने भावुक होकर लिखा था कि अपर्णा को सिर्फ अपनी लोकप्रियता की चिंता है और उन्होंने एक हंसते-खेलते परिवार में दरार पैदा कर दी है। हालांकि, इस ‘डिजिटल विवाद’ के महीने भर बाद ही उन्होंने ‘ऑल इज वेल’ लिखकर सुलह के संकेत दिए थे, लेकिन उन कड़वे शब्दों ने रिश्तों में आई दरार को दुनिया के सामने उजागर कर दिया था।
अपर्णा का भाजपा प्रेम और प्रतीक की खामोशी
यादव परिवार में वैचारिक विभाजन तब और गहरा गया जब अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी की विचारधारा से अलग हटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों की प्रशंसा शुरू की। जहां प्रतीक यादव अपने रियल एस्टेट और जिम चेन ‘द फिटनेस प्लेनेट’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, वहीं अपर्णा की बढ़ती राजनीतिक महात्वाकांक्षाओं ने परिवार में खींचतान पैदा की। जनवरी 2022 में जब अपर्णा आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हुईं, तो अखिलेश यादव और प्रतीक के बीच भी दूरियां बढ़ती दिखीं, हालांकि प्रतीक ने सार्वजनिक रूप से इस पर चुप्पी साधे रखी।
साधना गुप्ता और मुलायम सिंह के निधन के बाद एकजुट हुआ कुनबा
प्रतीक की मां साधना गुप्ता और फिर अक्टूबर 2022 में नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन ने पूरे परिवार को एक बार फिर करीब ला दिया। दुख की इस घड़ी में राजनीतिक मतभेद पीछे छूट गए और प्रतीक-अपर्णा को अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े देखा गया। अंतिम संस्कार के समय दिखी इस एकजुटता ने रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने का काम किया। प्रतीक ने हमेशा एक मर्यादा बनाए रखी और अपर्णा के राजनीतिक फैसलों के खिलाफ कभी खुलकर मोर्चा नहीं खोला।
देवरानी-जेठानी की केमिस्ट्री
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, यादव परिवार की बहुओं यानी डिंपल यादव और अपर्णा यादव के बीच अक्सर सहजता देखी गई। पिछले कुछ समय में पारिवारिक आयोजनों में दोनों के बीच की ‘बॉन्डिंग’ में काफी सुधार नजर आया। अपर्णा ने भी कई बार कहा कि राजनीति अपनी जगह है और परिवार के संस्कार अपनी जगह। हाल ही में जब भाजपा ने अपर्णा को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष नियुक्त किया, तब भी परिवार के भीतर रिश्तों में एक संतुलन बना रहा। आज प्रतीक के चले जाने से इस 15 साल पुराने रिश्ते का एक अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है।










