Pollution Free Yamuna : यमुना सफाई अभियान को मिली रफ्तार, सरकार ने तय की अंतिम समयसीमा

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और समयबद्ध योजनाओं के जरिए यमुना को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Pollution Free Yamuna

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 10, 2026

Pollution Free Yamuna: दिल्ली और हरियाणा के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में ‘यमुना एक्शन प्लान’ की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने यमुना की जल गुणवत्ता सुधारने के लिए 31 दिसंबर 2027 की समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है, जिसके भीतर सभी लंबित और प्रस्तावित परियोजनाओं को पूरा करना अनिवार्य होगा।

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एकीकृत और तकनीक आधारित दृष्टिकोण

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल सतही सफाई नहीं, बल्कि स्रोत पर ही प्रदूषण को रोकना है। इसके लिए एक समन्वित, समयबद्ध और तकनीक आधारित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सीवेज शोधन (Sewage Treatment) और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन (Industrial Waste Management) के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे को न केवल अपग्रेड किया जाए, बल्कि नई तकनीक का उपयोग भी किया जाए।

प्रमुख परियोजनाओं पर विशेष ध्यान

यमुना कैचमेंट एरिया में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई:

पानीपत और करनाल में सुधार: पानीपत के जाट्टल रोड स्थित 10 एम.एल.डी. क्षमता के मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एस.टी.पी.) को अपग्रेड किया जाएगा। इससे घरेलू सीवेज के साथ-साथ औद्योगिक अपशिष्ट का भी बेहतर शोधन हो सकेगा। वहीं, करनाल के गांवों में 6 माइक्रो-एस.टी.पी. स्थापित करने की योजना है, जिससे नालों में बहने वाले अनुपचारित ‘ग्रे-वॉटर’ (Grey-water) को रोका जा सकेगा।

सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद का सुदृढ़ीकरण: तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों जैसे सोनीपत के नाथूपुर और कुंडली में प्रस्तावित सी.ई.टी.पी. (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) और राठधना एस.टी.पी. की क्षमता बढ़ाने पर काम किया जाएगा। इसी तरह, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी अपशिष्ट जल उपचार अवसंरचना को मजबूती दी जाएगी।

नियमित निगरानी और जवाबदेही

मुख्य सचिव ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी एस.टी.पी. और सी.ई.टी.पी. से निकलने वाले शोधित जल की नियमित निगरानी की जाए। यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि निष्कासन निर्धारित पर्यावरणीय मानकों (Parameters) के अनुरूप ही हो। उन्होंने विभागों को यह भी चेतावनी दी है कि भूमि अधिग्रहण या प्रक्रियात्मक मामलों में देरी को अब सहन नहीं किया जाएगा और लंबित मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

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