POK Protest : निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, POK में हिंसा के बीच 16 की मौत

क्या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तख्तापलट होने वाला है? बुनियादी हक और आजादी की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सीधे गोलियां बरसा दीं, जिससे 16 लोगों की मौत हो गई। खूनखराबे के बाद सुलग रहे पीओके के मौजूदा हालातों की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जानिए।

POK Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 11, 2026

POK Protest : पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट शहर से एक बेहद दर्दनाक और खूनी संघर्ष की खबर सामने आई है। यहां के ऐतिहासिक ईदगाह मैदान में बुनियादी मानवाधिकारों और आर्थिक राहत के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हजारों नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स के जवानों ने अचानक अंधाधुंध गोलियां चला दीं। प्रदर्शनकारी सरकार से सस्ता आटा, चावल, बिजली और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की मांग कर रहे थे। इस रैली में करीब 60,000 से 70,000 लोग जमा हुए थे, जिन पर सुरक्षा बलों ने बिना किसी चेतावनी के सीधे एके-47 राइफलों से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई।

हिंसा में भारी जानी नुकसान

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस अमानवीय और हिंसक कार्रवाई के बाद पूरे रावलकोट में खौफनाक और विचलित करने वाला मंजर दिखाई दे रहा है। चारों तरफ खून से सनी सड़कें, खेतों में बिखरी लाशें और अपनों को ढूंढते रोते-बिलखते परिवार इस दमनकारी कार्रवाई की गवाही दे रहे हैं। ईदगाह मैदान में हुई ताजा गोलीबारी में कम से कम 16 नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 37 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह दमन पिछले कुछ दिनों से जारी है और शुक्रवार से शुरू हुए इस आंदोलन पर हुई अलग-अलग कार्रवाइयों में अब तक कुल 53 बेकसूर नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं।

बर्बरता के खिलाफ फूटा भयंकर जन-आक्रोश

सेना की इस अमानवीय क्रूरता ने पूरे पीओके क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। रावलकोट की घटना के विरोध में खाई गाला गांव सहित कई इलाकों के लोगों ने अपने बाजार पूरी तरह बंद कर दिए और सेना की हिंसा के खिलाफ विशाल मार्च निकाला। इस न्याय मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे भी शामिल हुए। उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों के लिए न्याय की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना के खिलाफ एक बेहद तीखा नारा लगाया, जो इस समय पूरे पीओके में गूंज रहा है— ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।’

जान की परवाह किए बिना डटे प्रदर्शनकारी

इतने बड़े पैमाने पर हुए खून-खराबे और भारी सैन्य दबाव के बावजूद, आंदोलनकारियों ने पीछे हटने या अपना प्रदर्शन खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है। हजारों की संख्या में लोग अब भी रावलकोट की सड़कों पर डटे हुए हैं और आर्थिक राहत व राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। गोलीबारी के तत्काल बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार अमान खान ने बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और चाहे कितनी भी जानें क्यों न चली जाएं, यह ऐतिहासिक आंदोलन अधिकारों की प्राप्ति तक थमेगा नहीं।

बुनियादी अधिकारों की लड़ाई बनाम बंदूक की गोली

पीओके की सड़कों पर उतरे इन आम नागरिकों के हाथों में कोई हथियार या बंदूकें नहीं हैं; वे केवल अपने बच्चों के लिए सस्ता खाना, सस्ती बिजली और एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मांग रहे हैं। लेकिन इसके बदले में पाकिस्तानी हुकूमत उन्हें सिर्फ गोलियां और मौत दे रही है। इस वक्त पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है, जहां एक तरफ मृतकों के जनाजे उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं। रावलकोट की यह दुखद स्थिति इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब कोई दमनकारी सत्ता अपने ही नागरिकों की जायज आवाज को कुचलने के लिए सैन्य बल का प्रयोग करती है, तो कितनी बड़ी मानवीय त्रासदी जन्म लेती है।

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