PoJK Protest: जम्मू में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन, भारत में विलय की मांग हुई तेज

जम्मू में PoJK को लेकर पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है, जहां प्रदर्शनकारियों ने भारत में विलय की मांग दोहराई। बढ़ते विरोध और नारों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा और इसका राजनीतिक व क्षेत्रीय प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है।

PoJK Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 31, 2026

PoJK Protest:  पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoJK में इन दिनों आम नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और सेना द्वारा लगातार भीषण अत्याचार किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा खुलेआम गोलियां चलाई जा रही हैं। नियंत्रण रेखा (LOC) के उस पार से लगातार आ रही बेगुनाहों की चीख-पुकार और पाकिस्तान द्वारा मानवाधिकारों के किए जा रहे घोर उल्लंघन के विरोध में आज जम्मू में विस्थापित लोगों ने सड़कों पर उतरकर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया।

जम्मू में विस्थापितों का पाकिस्तान के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

पाकिस्तान के अमानवीय कृत्यों और अत्याचारों के खिलाफ जम्मू में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में PoJK के विस्थापित लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भारत सरकार से मांग की कि PoJK को जल्द से जल्द भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में कड़े कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हुक्मरान वहां के मूल निवासियों की आवाज को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों पर दमन और भारत से जुड़ने की इच्छा

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की दमनकारी सुरक्षा एजेंसियों पर PoJK के स्थानीय मासूम नागरिकों के खिलाफ अमानवीय दमन चक्र चलाने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना था कि वहां के मौजूदा हालातों और भीषण उत्पीड़न से त्रस्त होकर स्थानीय आबादी पूरी तरह परेशान हो चुकी है और अब वे पाकिस्तान के चंगुल से छूटकर भारत के साथ जुड़ने की तीव्र इच्छा रखते हैं। दमनकारी नीतियों के कारण वहां का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है।

पुश्तैनी घरों और जमीनों पर लौटने की पुरजोर मांग

प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि दशकों पहले PoJK से विस्थापित होकर भारत आए शरणार्थी आज भी अपने पुश्तैनी घरों, पुरखों की जमीन-जायदाद और जन्मस्थली पर वापस लौटने की गहरी कसक रखते हैं। इन विस्थापित परिवारों का दर्द है कि वे अपने ही घर-आसमान के नीचे जाने से वंचित हैं और पाकिस्तान उनके बुनियादी अधिकारों को बेरहमी से कुचल रहा है। सरकार को इन विस्थापितों की घर वापसी के लिए विशेष कार्ययोजना बनानी चाहिए।

संसद के ऐतिहासिक प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का आग्रह

जम्मू में प्रदर्शन कर रहे विस्थापितों ने भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का भी विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया गया है। उनका कहना था कि PoJK के मौजूदा और बिगड़ते हालात के बीच अब वक्त आ गया है कि संसद के उस प्रस्ताव को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस और निर्णायक कार्रवाई की जाए।

मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत और दुनिया से कड़ी प्रतिक्रिया

प्रदर्शनकारियों ने PoJK में मानवाधिकारों के हो रहे कथित और खुलेआम उल्लंघन पर भारत सरकार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी बेहद कड़ी प्रतिक्रिया देने की पुरजोर मांग की। उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान सरकार और उसकी बर्बर सुरक्षा एजेंसियों पर जबरदस्त कूटनीतिक दबाव बनाया जाना चाहिए, ताकि वहां के बेकसूर नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जा सके।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर PoJK की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करने की अपील

प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से यह अपील की कि वह PoJK के पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वहां के मौजूदा काले हालातों और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद व अत्याचारों की तस्वीर को पूरी ताकत और स्पष्टता के साथ रखा जाए, जिससे दुनिया पाकिस्तान का असली और क्रूर चेहरा देख सके।

विस्थापित परिवारों की आकांक्षाओं को गंभीरता से लेने की जरूरत

समापन अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पीढ़ियों से अपनी मातृभूमि से दूर रह रहे विस्थापित परिवारों की अपने पुश्तैनी क्षेत्रों में सम्मान के साथ लौटने की प्राचीन आकांक्षा को सरकार द्वारा अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार PoJK के नागिरकों के हितों और उनके मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए भविष्य में भी हर संभव और मजबूत कदम उठाती रहेगी।

Read More :  UP Politics: बदले गए जिलों के नाम फिर होंगे वापस? भदोही फैसले के बाद मायावती ने की चौंकाने वाली मांग