UP Politics: बदले गए जिलों के नाम फिर होंगे वापस? भदोही फैसले के बाद मायावती ने की चौंकाने वाली मांग

भदोही का नाम फिर से 'संत रविदास नगर' करने के फैसले पर बसपा प्रमुख मायावती ने योगी सरकार का आभार जताया है। साथ ही, उन्होंने सपा सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की है कि मान्यवर कांशीराम और अन्य महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के पुराने नाम 9 अक्टूबर से पहले बहाल किए जाएं।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 31, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश में जिलों के नामकरण की राजनीति एक बार फिर से बेहद गर्म हो गई है। भदोही जिले का आधिकारिक नाम बदलकर वापस ‘संत रविदास नगर’ करने के राज्य सरकार के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पुरानी मांग को एक बार फिर से पुरजोर तरीके से दोहराते हुए दलित, शोषित और पिछड़े वर्ग के महान महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों के पुराने नाम बहाल करने की अपील की है।

मायावती का आरोप

बताते चले कि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार चार बिंदुओं में अपनी बात रखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि उनके पिछले शासनकाल के दौरान प्रशासनिक कसावट, कानून-व्यवस्था और आम जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कई नए जिलों, तहसीलों, विकास खंडों और पुलिस जोन्स का गठन किया गया था। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बसपा सरकार ने दलित, पिछड़े और वंचित समाज के महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के सम्मान में संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर जैसे नाम रखे थे, लेकिन बाद की समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने अपनी संकीर्ण और जातिवादी मानसिकता के चलते इन ऐतिहासिक नामों को बदल दिया, जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी।

कासगंज और ‘कांशीराम नगर’ के नामकरण का जिक्र

ब्रज क्षेत्र के राजनीतिक और भौगोलिक विकास का विशेष उल्लेख करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि उस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए ही कासगंज को एक नया जिला मुख्यालय बनाया गया था, जिसका नाम पार्टी ने आदरणीय ‘कांशीरामनगर’ रखा था। मायावती का कड़ा आरोप है कि तत्कालीन सपा सरकार ने अपने राजनीतिक द्वेष और विरोधी रवैये के कारण इस जिले का नाम भी रातोंरात बदल दिया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम से जुड़े इन ऐतिहासिक प्रतीकों को मिटाने का प्रयास राजनीतिक संकीर्णता का जीता-जागता उदाहरण है।

जिलों के असली नाम बहाल करने की मांग

योगी सरकार के सामने अपनी बड़ी मांग रखते हुए बसपा सुप्रीमो ने अपील की है कि जिस प्रकार सरकार ने भदोही का नाम ‘संत रविदास नगर’ किया है, ठीक उसी तरह मान्यवर श्री कांशीराम जी व अन्य महापुरुषों के नाम पर स्थापित किए गए अन्य सभी जिलों के भी असली नाम जल्द से जल्द बहाल कर दिए जाएं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विशेष रूप से सुझाव देते हुए लिखा है कि यदि यह ऐतिहासिक कार्य मान्यवर श्री कांशीराम जी के आगामी 9 अक्टूबर को आने वाले परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन कर दिया जाए, तो बहुजन समाज पार्टी और उनके समर्थक इसके लिए सरकार के आभारी रहेंगे।