PMO Lok Sabha Update: PM CARES समेत तीन फंडों पर संसद में सवाल नहीं, पीएमओ ने लोकसभा को बताया कारण

संसद में पीएम केयर्स (PM CARES) समेत तीन प्रमुख फंडों को लेकर पूछे गए सवालों पर पीएमओ ने अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार ने लोकसभा में उन तकनीकी और कानूनी कारणों का हवाला दिया है, जिसके तहत इन फंडों का ब्योरा संसदीय सवालों के माध्यम से साझा नहीं किया जा सकता। क्या है वो तर्क?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 9, 2026

PMO Lok Sabha Update: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने स्पष्ट कर दिया है कि PM CARES फंड समेत प्रधानमंत्री से जुड़े तीन प्रमुख फंडों पर संसद में कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता। इस संबंध में पीएमओ ने लोकसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पत्र 30 जनवरी को भेजा गया था, जिसमें लोकसभा के प्रक्रिया नियमों का हवाला देते हुए अपनी स्थिति साफ की गई है।

लोकसभा नियमों का दिया गया हवाला

पीएमओ ने अपने पत्र में लोकसभा रूल्स के आर्टिकल 41(2)(8) और 41(2)(17) का उल्लेख किया है। इन नियमों के तहत ऐसे विषयों पर प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं होती, जो सीधे तौर पर केंद्र सरकार की जिम्मेदारी में नहीं आते। पीएमओ का तर्क है कि संबंधित फंड किसी सरकारी मंत्रालय या विभाग के अंतर्गत नहीं आते, इसलिए उन पर संसद में चर्चा नहीं की जा सकती।पीएमओ के पत्र में जिन तीन फंडों का उल्लेख है, उनमें PM CARES फंड, प्राइम मिनिस्टर नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) और नेशनल डिफेंस फंड (NDF) शामिल हैं। संयोग से ये तीनों फंड प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन आते हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि इनकी प्रकृति सरकारी नहीं, बल्कि चैरिटेबल और सार्वजनिक दान पर आधारित है।

पूरी तरह पब्लिक डोनेशन से बने हैं फंड

प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्य तर्क यह है कि इन तीनों फंडों का निर्माण पूरी तरह जनता के दान से हुआ है। इनके लिए केंद्र सरकार के खजाने से कोई राशि आवंटित नहीं की गई है। इसी आधार पर पीएमओ का कहना है कि इन फंडों को संसद की जवाबदेही के दायरे में नहीं लाया जा सकता।PM CARES फंड की स्थापना 27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी। सरकारी वेबसाइट के अनुसार, इसका उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों जैसे महामारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य गंभीर संकटों में प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। यह फंड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है।

PM CARES की कानूनी स्थिति और जमा राशि

PM CARES फंड की ट्रस्ट डीड दिल्ली में रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के तहत पंजीकृत है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 तक इस फंड में 6,283.7 करोड़ रुपये जमा थे। फंड की कानूनी संरचना को सरकार बार-बार एक स्वतंत्र चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में प्रस्तुत करती रही है।प्राइम मिनिस्टर नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) की स्थापना जनवरी 1948 में हुई थी। इसका उद्देश्य देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए विस्थापितों की सहायता करना था। वहीं, नेशनल डिफेंस फंड (NDF) का गठन सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों व उनके परिवारों की मदद के लिए किया गया।

एग्जीक्यूटिव कमेटी करती है फंडों का संचालन

नेशनल डिफेंस फंड का संचालन एक एग्जीक्यूटिव कमेटी करती है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। इस समिति में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री भी सदस्य होते हैं। इसके बावजूद पीएमओ का कहना है कि चूंकि इन फंडों में सरकारी बजट का पैसा नहीं लगता, इसलिए सरकार इनकी प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं है।

संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताने का आधार

लोकसभा के नियम 41(2)(8) के अनुसार, ऐसे विषयों पर सवाल नहीं पूछे जा सकते जो केंद्र सरकार से सीधे संबंधित न हों। वहीं, नियम 41(2)(17) कहता है कि जिन मामलों की जिम्मेदारी सरकार पर नहीं, बल्कि किसी अन्य संस्था या व्यक्ति पर हो, वे भी प्रश्नकाल के दायरे से बाहर होते हैं। इन्हीं प्रावधानों के आधार पर पीएमओ ने संसद में इन फंडों पर सवाल न पूछे जाने की बात कही है।

फैसले पर बढ़ सकती है सियासी बहस

हालांकि पीएमओ का यह रुख नियमों पर आधारित बताया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष पहले भी इन फंडों की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाता रहा है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।