PM Vishwakarma WB : देश के पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे हुनरमंदों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ (PM Vishwakarma Yojana) को अब पश्चिम बंगाल में भी पूरी तरह लागू किया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा की है। केंद्र सरकार का यह बड़ा और रणनीतिक कदम पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के ठीक कुछ दिनों बाद ही सामने आया है, जिसे राज्य के विकास के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अतिरिक्त सचिव और मुख्य सचिव के बीच हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक
इस कल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारने और इसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने कोलकाता का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक की। इस कूटनीतिक बैठक में मुख्य रूप से योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान को पारदर्शी व बेहतर बनाने, कारीगरों के कौशल विकास (Skill Development) को आधुनिक तकनीकों से मजबूत करने और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों तक योजना की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के रणनीतिक उपायों पर गहन चर्चा की गई।
सितंबर दो हजार तेईस में हुई थी शुरुआत
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस बैठक में पीएम विश्वकर्मा योजना के साथ-साथ राज्य में चल रही अन्य केंद्रीय एमएसएमई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय को बढ़ाकर लघु उद्योगों के परिवेश (Ecosystem) को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी विस्तार से विचार किया गया। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय के इस सकारात्मक सहयोग की सराहना करते हुए केंद्र की सभी जनहितैषी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा यह योजना 17 सितंबर, 2023 को शुरू की गई थी, और अब पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके बेहतर संचालन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति और जिला स्तरीय कार्यान्वयन समितियों के गठन की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
पारंपरिक शिल्पकला का संरक्षण और आधुनिक उपकरणों के लिए मिलेगी भारी मदद
इस दूरगामी योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रजनीश ने कहा कि यह योजना न केवल भारत की प्राचीन व पारंपरिक शिल्पकला के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह गरीब कारीगरों को आधुनिक टूलकिट (उपकरण), औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के जरिए वित्तीय पहुंच और वैश्विक स्तर पर बेहतर बाजार के नए अवसर उपलब्ध कराने में भी केंद्रीय भूमिका निभाएगी। उन्होंने रेखांकित किया कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उत्कृष्ट हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध पश्चिम बंगाल में इस योजना के सफल क्रियान्वयन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
सात लाख से अधिक कारीगर पहले से पंजीकृत
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस योजना के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है और राज्य में अब तक लगभग 7.79 लाख पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार अपना डिजिटल पंजीकरण (Registration) करा चुके हैं। बताते चलें कि पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई और मूर्तिकार जैसे 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को बिना किसी गारंटी के बेहद कम ब्याज दर पर ऋण (Loan) सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, उनकी कार्यक्षमता, उत्पादकता और उत्पादों की वैश्विक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उन्हें एडवांस ट्रेनिंग के साथ-साथ आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 की नकद वित्तीय सहायता भी दी जाती है।










