PM Modi-Putin Meet: ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। लगभग 40 मिनट तक चली इस मुलाकात की शुरुआत बेहद गर्मजोशी के साथ हुई, जहां दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का स्वागत किया और गले मिले।
इस अवसर पर सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करते हुए पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को महान दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित प्राचीन तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया। प्रधानमंत्री ने पुतिन से कहा कि यह मानव मूल्यों से जुड़ी एक अनमोल पुस्तक है, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करेगी। बैठक के तुरंत बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर प्रदर्शनी देखने के लिए रवाना हुए।
रक्षा और विमानन क्षेत्र में बड़े समझौते

इस उच्चस्तरीय बैठक पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं, क्योंकि इसमें व्यापार, परमाणु ऊर्जा, आर्थिक सहयोग, परिवहन और रक्षा जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। मुलाकात से ठीक पहले भारत को 105 आईएल-114-300 (IL-114-300) सिविल विमानों की आपूर्ति करने के लिए रूस पूरी तरह तैयार हो गया है। रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने भारत मंडपम में चल रही ‘इनोप्रॉम’ (INNOPROM) प्रदर्शनी के दौरान भारतीय कंपनियों के साथ इस क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमान की आपूर्ति के समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत पिनेकल एयर को 50 और एयर केरल को 20 यूनिट्स तक मिलने की बात तय हुई है। इसके अलावा, रूसी राष्ट्रपति के एजेंडे में भारत को अत्याधुनिक Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट देने का प्रस्ताव भी शामिल था, जिससे दोनों देशों की रक्षा साझेदारी का अगला अध्याय और मजबूत हो सके।
ऊर्जा व्यापार और वैकल्पिक मुद्राओं का उपयोग
वैश्विक प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के बीच आर्थिक और ऊर्जा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार का एक बड़ा हिस्सा अब अमेरिकी डॉलर के दबाव से बचते हुए भारतीय रुपए और रूसी रूबल के माध्यम से संचालित हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर, जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत यानी लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
वैश्विक संघर्ष और कूटनीतिक संदेश

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-अमेरिका जैसे बड़े संघर्षों के दौर से गुजर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच वैश्विक रणनीतिक समीकरणों और शांति स्थापना पर भी गंभीर चर्चा हुई। भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि समस्याओं का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। इससे पहले 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के दौरान भी पीएम मोदी ने पुतिन से मुलाकात में स्पष्ट कहा था कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, इसलिए दुनिया को संघर्ष से शांति की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, और इसी वर्ष ब्रिक्स के गठन के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।
BRICS Summit 2026: पुतिन पहुंचे भारत, आज मोदी से मुलाकात; रक्षा-ऊर्जा










