PM Modi in Lok Sabha: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और गहराते वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा को संबोधित किया। पिछले 24 दिनों से जारी इस संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों और वहां फंसे नागरिको की सुरक्षा को लेकर पीएम का यह भाषण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे हर भारतीय की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब तक ‘ऑपरेशन’ के तहत 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। इस संबोधन के माध्यम से पीएम ने न केवल विपक्ष के सवालों का जवाब दिया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की एकजुटता का संदेश भी साझा किया।
संसद में गूंजी भारतीयों की सुरक्षा की गूंज
बताते चले कि, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं और इसका असर सीधे तौर पर भारत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि संकट की शुरुआत से ही सरकार ने 24X7 हेल्पलाइन और निरंतर एडवाइजरी के जरिए नागरिकों से संपर्क बनाए रखा है। पीएम ने गर्व के साथ बताया कि अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश वापस लौट चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय निवास करते हैं और समुद्री रास्तों (Shipping Routes) पर भी भारतीय क्रू मेंबर्स की बड़ी संख्या है, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रही है।
होर्मूज स्ट्रेट और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच होर्मूज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में आ रही बाधाओं पर भी प्रधानमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने सदन को बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने स्वयं विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से दो बार टेलीफोन पर वार्ता की है, जहां उन्हें भारतीयों की सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन मिला है। पीएम ने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक संकट के समय भारत की संसद से एकमत और एकजुट आवाज दुनिया के सामने जानी चाहिए। उन्होंने उन परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने इस जंग में अपनों को खोया है या जिनके सदस्य घायल हुए हैं, और बताया कि भारतीय मिशन वहां मौजूद हर व्यक्ति को चिकित्सा और रसद सहायता प्रदान कर रहे हैं।
उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के निर्णय
आपको बता दे कि, रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा ली गई 3.30 घंटे की लंबी मैराथन बैठक का जिक्र करते हुए सूत्रों ने बताया कि सरकार पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों में किसी भी कमी को बर्दाश्त नहीं करेगी। पीएम ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि युद्ध की आड़ में देश के भीतर जमाखोरी और कालाबाजारी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विपक्ष द्वारा उठाए गए ऊर्जा संकट के आरोपों पर लगाम लगाते हुए उन्होंने मंत्रियों को रसद (Logistics) और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध रूप से जारी रहेगी।
लोकसभा की कार्यवाही
सत्र के दौरान जहां एक ओर प्रधानमंत्री ने विदेश नीति और सुरक्षा पर अपनी बात रखी, वहीं दूसरी ओर विधायी कार्यों को भी गति दी गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सदन में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगी, जिसका उद्देश्य लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप और कंपनी एक्ट में सुधार करना है। गौरतलब है कि विपक्ष पिछले कई दिनों से एनर्जी और तेल की कमी को लेकर बहस की मांग कर रहा है। हालांकि, सरकार ने ‘गिलोटिन’ प्रक्रिया के जरिए अनुदान मांगों को पारित कर यह संकेत दे दिया है कि वह विकास कार्यों में देरी नहीं चाहती। प्रधानमंत्री के इस भाषण ने विपक्ष के उन तमाम दावों को खारिज करने की कोशिश की है जिनमें देश की तैयारियों पर सवाल उठाए जा रहे थे।









