Petrol Diesel Price: देशभर में 13 जून को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन हाल ही में हुई लगातार बढ़ोतरी के कारण ईंधन के दाम मई 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹2.50 प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद से आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार से राहत की खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
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प्रमुख शहरों में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम?
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल ₹111.21 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल ₹113.51 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹107.87 और डीजल ₹99.65 प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है।
इसके अलावा लखनऊ में पेट्रोल ₹101.89 और डीजल ₹95.36 प्रति लीटर, जयपुर में पेट्रोल ₹112.66 और डीजल ₹97.78 प्रति लीटर तथा हैदराबाद में पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर पर उपलब्ध है। देश के विभिन्न शहरों में स्थानीय टैक्स और वैट के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
क्यों बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम?
पिछले कुछ सप्ताहों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र प्रभावित हुआ, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी जलमार्ग से गुजरती है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 65 प्रतिशत और एलपीजी का 90 प्रतिशत हिस्सा इस क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने ईंधन की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया।
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, राहत की उम्मीद
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मार्च के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और तेल की कीमतों पर दबाव बना है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत हाल ही में 3.4 प्रतिशत गिरकर 87.33 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। पिछले कुछ सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जो आगे चलकर भारतीय बाजार में भी राहत का कारण बन सकती है।
सरकार ने दिया राहत का भरोसा
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर नहीं टिकेंगी और आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था भी की है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी बनी रहती है, तो आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।
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