Parliament Protest: संसद परिसर में सपा का प्रदर्शन, अखिलेश बोले- दानपात्र नहीं बचा सके, पेपर लीक क्या रोकेंगे

संसद परिसर में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दानपात्र का जिक्र करते हुए सरकार की क्षमता पर सवाल उठाए। आखिर इस बयान का राजनीतिक मतलब क्या है और सत्ता पक्ष ने क्या जवाब दिया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Parliament Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 29, 2026

Parliament Protest: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा के सभी सांसद संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्र हुए और हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़” और “चंदा चोर, गद्दी छोड़” जैसे नारे लगाए। सपा नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है।

अखिलेश यादव ने सरकार को बताया युवाओं के भविष्य के लिए खतरा

प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो सरकार श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में श्रद्धा से चढ़ाए गए दान और दानपात्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, उससे देश की परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जनता अब जवाब चाहती है।

राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे को पेपर लीक से जोड़ा

सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों में समानता दिखाई देती है। उनके अनुसार, यदि सरकार करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े धन की सुरक्षा नहीं कर सकती, तो शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य की रक्षा करने के उसके दावे भी कमजोर पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा रोजगार और निष्पक्ष परीक्षाओं की उम्मीद कर रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने उसका भरोसा कमजोर किया है।

मानसून सत्र में दोनों सदनों में उठेगा मुद्दा

समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले को संसद के दोनों सदनों में मजबूती से उठाएगी। पार्टी का कहना है कि सरकार को इस कथित मामले पर विस्तृत जवाब देना चाहिए और यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। सपा नेताओं का कहना है कि संसद लोकतांत्रिक जवाबदेही का सबसे बड़ा मंच है और इस विषय पर सरकार को तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि वह मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को लगातार उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।

रामगोपाल यादव ने आस्था से जुड़ा बताया मामला

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि यह विवाद केवल किसी एक संस्था या राज्य का विषय नहीं है, बल्कि दुनिया भर में भगवान राम के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि दानपात्र से कथित रूप से गायब हुई धनराशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उनके अनुसार, जनता को यह जानने का अधिकार है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और उसकी निगरानी कैसे हो रही है।

पुराने आरोपों का भी किया उल्लेख

रामगोपाल यादव ने दावा किया कि मंदिर से जुड़े आर्थिक अनियमितताओं के आरोप नए नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों की चर्चा वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के समय से होती रही है। उनके अनुसार, हाल में जिन कथित आंकड़ों की चर्चा हो रही है, वे केवल लगभग 45 से 50 दिनों की अवधि से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि सभी तथ्य सार्वजनिक हो सकें और श्रद्धालुओं के मन में यदि कोई संदेह है तो उसे दूर किया जा सके।

सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

समाजवादी पार्टी ने दोहराया कि वह इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरती रहेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था, सार्वजनिक धन और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। सपा ने सरकार से मांग की कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की जानकारी देश के सामने रखी जाए। इससे जनता का विश्वास मजबूत होगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

Read More  : Anti Paper Leak Bill: लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा आरोप, छात्रों पर पैलेट गन चलाने का दावा