MP में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों का शक्ति प्रदर्शन, भोपाल में संविदाकर्मी दर्जा और ₹50 लाख बीमा की मांग

भोपाल. मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबित मांगों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समय देने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी भोपाल पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। रविवार को भोपाल के आंबेडकर मैदान में धरना देने पहुंचे। यहां प्रदेशभर से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। पदाधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर अपर मुख्य ऊर्जा सचिव एवं ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक हुई थी। दोनों बैठकों में मिले आश्वासन के बाद भी मांगो का निराकरण नहीं

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Published On :

अगस्त 2, 2026

भोपाल.

मप्र विद्युत कर्मचारी संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबित मांगों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समय देने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवनारायण राजपूत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी भोपाल पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

रविवार को भोपाल के आंबेडकर मैदान में धरना देने पहुंचे। यहां प्रदेशभर से हजारों की संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। पदाधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर अपर मुख्य ऊर्जा सचिव एवं ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक हुई थी। दोनों बैठकों में मिले आश्वासन के बाद भी मांगो का निराकरण नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।

नहीं हुआ समस्याओं का निराकरण
संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी का दर्जा देकर समान सुविधाएं देने अथवा हरियाणा की तर्ज पर आउटसोर्स सेवा सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की है। इसके अलावा परीक्षा के माध्यम से नियमितीकरण, अनुभव के आधार पर बोनस अंक, जोखिम भत्ता तीन हजार रुपये करने और आदी के निराकरण की मांग की है।

दुर्घटना में मृत्यु पर 50 लाख की मांग
ज्ञापन में कंप्यूटर आपरेटरों को उच्च कुशल श्रेणी में शामिल करने, विद्युत दुर्घटना में मृत्यु पर 50 लाख रुपये तथा अन्य परिस्थितियों में कम से कम 20 लाख रुपये की बीमा सहायता, आश्रित को नौकरी, राष्ट्रीय त्योहारों एवं रात्रिकालीन ड्यूटी का अतिरिक्त पारिश्रमिक, दुर्घटना में घायल होने पर तत्काल आर्थिक सहायता और पूरे प्रदेश में शत-प्रतिशत ईएसआइसी लागू करने की मांग भी शामिल है।

इसके अलावा बोनस 20 प्रतिशत करने, लंबित वेतन पुनरीक्षण लागू करने, 26 दिन के स्थान पर 30 दिन का वेतन भुगतान तथा अनुभव के आधार पर वरिष्ठता और वेतन वृद्धि देने की मांग करते हुए संगठन ने मुख्यमंत्री से शीघ्र बैठक कर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।