Operation Sindoor Anniversary : जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान पूर्व डीजीएमओ (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली सालगिरह पर देश के गौरवशाली सैन्य इतिहास को याद किया। उन्होंने इस अभियान को भारत की रणनीतिक यात्रा का एक ‘टर्निंग पॉइंट’ करार दिया। जनरल घई के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य जवाबी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह आतंकवाद के प्रति भारत के बदलते नजरिए और सख्त दृष्टिकोण का एक जीवंत प्रमाण था। इस ऑपरेशन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब केवल अपनी रक्षा नहीं करेगा, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर प्रहार करने की क्षमता और इच्छाशक्ति भी रखता है।
पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भारी प्रहार और भारतीय रक्षा संपत्तियों की सुरक्षा
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने अभियान के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के 11 रणनीतिक एयरफील्ड और 9 प्रमुख आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्रों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। भारतीय सेना ने दुश्मन के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया, जबकि सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत ने अपने एक भी सैन्य एसेट (Military Asset) को नुकसान नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रहार इतना सटीक और मारक था कि पाकिस्तान के पास रक्षा का कोई विकल्प नहीं बचा था और अंततः उसे ही युद्ध रोकने की गुहार लगानी पड़ी।
स्वदेशी तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की शक्ति का सफल प्रदर्शन
ऑपरेशन की सफलता के पीछे स्वदेशी हथियारों के योगदान का उल्लेख करते हुए पूर्व डीजीएमओ ने बताया कि इस दौरान कुल 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गईं। इनमें से 7 स्ट्राइक भारतीय सेना और 2 भारतीय वायुसेना द्वारा अंजाम दी गईं। इस मिशन में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी तंत्र ने रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया। उन्होंने गर्व से कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने सिद्ध कर दिया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ महज एक नारा नहीं है, बल्कि यह युद्ध के मैदान में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला एक वास्तविक हथियार है।
विभिन्न सुरक्षा संगठनों का अद्भुत समन्वय और पाकिस्तान की विवशता
इस अभियान की सफलता का एक बड़ा श्रेय खुफिया एजेंसियों, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विंग, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य सुरक्षा संगठनों के बीच के शानदार तालमेल को जाता है। जनरल घई ने खुलासा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान इस कदर लाचार और असहाय हो गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय माध्यमों और सीधी लाइनों का उपयोग कर भारत से ‘रुकने’ की भावुक अपील की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन का मूल उद्देश्य केवल आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी हिमाकत को रोकने के लिए एक कड़ा निवारक (Deterrence) स्थापित करना था।
आतंक के खिलाफ ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ और 100 से अधिक आतंकियों का खात्मा
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने सीमा पार चल रहे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन जैसे खतरनाक संगठनों के लॉन्च पैड्स को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिसमें 100 से ज्यादा खूंखार आतंकवादी मारे गए। जब पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी कोशिश की, तो भारतीय रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने उन्हें नाकाम कर दिया। अंततः 10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारत से संपर्क कर संघर्ष विराम की विनती की। आज इस ऑपरेशन को वैश्विक स्तर पर सैन्य और रणनीतिक योजना का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है, जो भारत की संप्रभुता की रक्षा की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।










