Nishikant Dubey slams Congress: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर संवैधानिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का विरोध करने वाले दलों की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित बताया।
निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर वार
निशिकांत दुबे ने न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को प्रभावित किया है। उन्होंने पूर्व चुनाव आयुक्तों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने अपने फायदे के लिए इन पदों का इस्तेमाल किया। दुबे के अनुसार, जहां भाजपा ने कभी भी चुनाव आयुक्तों के खिलाफ महाभियोग या उनकी निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए, वहीं विपक्ष लगातार संस्थाओं को विवादों में घसीट रहा है।
चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक संबंधों का विश्लेषण
सांसद ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल का उल्लेख करते हुए कहा कि सोनिया गांधी की नागरिकता से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के बाद उन्हें कांग्रेस सरकार में मंत्री बनाया गया था। इसके अलावा, उन्होंने टी.एन. शेषन का उदाहरण दिया, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। दुबे का तर्क है कि भाजपा ने इन उदाहरणों के बावजूद संस्थागत मर्यादा बनाए रखी, जबकि वर्तमान विपक्ष निराधार आरोप लगा रहा है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनावी शुचिता पर वैचारिक विमर्श
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए दुबे ने इसे चुनावी निष्पक्षता के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के समय में भी चुनाव आयोग को ऐसे कार्य करने के निर्देश दिए गए थे, जिस पर भाजपा ने कभी आपत्ति नहीं की। दुबे ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहा है ताकि घुसपैठियों या अवैध मतदाताओं के जरिए अपना ‘वोट बैंक’ सुरक्षित रखा जा सके।
राहुल गांधी और विदेशी ताकतों के बीच कथित रणनीतिक सांठगांठ
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उनके विरोध को ‘जॉर्ज सोरोस’ के एजेंडे से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी का हर कदम देश को बांटने वाली विदेशी ताकतों के इशारे पर संचालित हो रहा है, जो भारतीय लोकतंत्र की नींव को कमजोर करना चाहते हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम
इस राजनीतिक घमासान के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में चुनावी शंखनाद कर दिया है। शेड्यूल के अनुसार:
- पश्चिम बंगाल: 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान।
- केरल, असम और पुडुचेरी: 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान।
- तमिलनाडु: 23 अप्रैल को चुनाव संपन्न होंगे।
इन सभी क्षेत्रों के चुनावी परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जो आगामी राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे।









