NEET Protest: संसद से सड़क तक NEET की गूंज, खरगे ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बड़ा बयान दिया है। खरगे ने कहा कि यदि सरकार वाकई इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा चाहती, तो संसद के पहले दिन ही विपक्ष की मांग मान लेती।

NEET Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 23, 2026

NEET Protest: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश की सियासत में भूचाल आया हुआ है। सड़क पर छात्र लाठियां खा रहे हैं, तो वहीं संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार वाकई में नीट मुद्दे पर गंभीर बहस चाहती, तो विपक्ष की पहली मांग पर ही संसद में चर्चा की अनुमति दे दी होती।

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पीएम मोदी की मंशा सही नहीं, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना चर्चा संभव नहीं

मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक विपक्ष शांत बैठने वाला नहीं है।

खरगे ने सरकार को घेरते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए

चर्चा से मुकरी सरकार: अगर सरकार सच में बहस के लिए तैयार होती, तो मानसून सत्र के पहले दिन ही विपक्ष की मांग मान ली जाती। सरकार ने चर्चा कराने के बजाय आंदोलन कर रहे छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज करवाया।

संसद में तानाशाही का आरोप: खरगे ने आरोप लगाया कि हम जनता के प्रतिनिधि हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के लोगों ने खुद आगे बढ़कर संसद का दरवाजा बंद कर दिया।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर प्रधानमंत्री अब तक चुप क्यों हैं? अगर इस बदहाली के लिए कोई जिम्मेदार है, तो वो खुद पीएम मोदी हैं, जिन्होंने अपने सांसदों को छात्रों के इस न्यायपूर्ण आंदोलन का विरोध करने का निर्देश दिया है।

नियम 267 के तहत बहस की मांग: विपक्ष नियम 267 के तहत सारे कामकाज रोककर नीट पर विस्तृत चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार इसके लिए राजी नहीं हुई। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं का अपमान किया। अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही कोई बातचीत होगी।

प्रियांक खरगे का बड़ा सवाल: करोड़ों छात्रों के भविष्य से बढ़कर एक मंत्री क्यों?

दूसरी तरफ, कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से न हटाने के सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार करोड़ों छात्रों के दर्द को समझने के बजाय एक मंत्री को बचाने में क्यों जुटी है?

प्रियांक खरगे ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा

क्या अपरिहार्य हैं धर्मेंद्र प्रधान?: धर्मेंद्र प्रधान भारत सरकार के लिए इतने जरूरी क्यों बने हुए हैं? वे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या पूरे कैबिनेट के लिए ऐसा कौन सा राज छिपा रहे हैं कि देश के करोड़ों युवाओं की पीड़ा के बावजूद सरकार उन्हें हटाने की हिम्मत नहीं कर पा रही है? यह पूरी तरह समझ से परे है।

‘परीक्षा पे चर्चा’ केवल दिखावा: प्रधानमंत्री ‘मन की बात’ और ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे बड़े-बड़े कार्यक्रम तो आयोजित करते हैं, लेकिन जब सच में छात्रों की बात सुनने का समय आता है, तो वे गायब हो जाते हैं।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश के युवाओं और छात्रों के बिना ही ‘अमृतकाल’ और ‘विकसित भारत’ का निर्माण करना चाहती है। दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर जो पुलिसिया कार्रवाई हो रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

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