NEET Protest: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य सरकार के मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के वरिष्ठ नेता केशव महंत का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी माता-पिता का मूल्यांकन उनके वयस्क बच्चों की राजनीतिक पसंद के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। यह बयान उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें केशव महंत की बेटी दिबिसा महंत कथित तौर पर NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं के विरोध प्रदर्शन में शामिल दिखाई दीं। इस प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
गुवाहाटी में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। वायरल क्लिप में दिबिसा महंत कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाती और NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही मांगती नजर आईं। हालांकि, समाचार एजेंसी पीटीआई ने स्पष्ट किया कि वह इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है। बावजूद इसके, वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के समर्थकों के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
हिमंता सरमा ने दिया मंत्री का खुलकर साथ
पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी मंत्री या सार्वजनिक प्रतिनिधि को केवल इसलिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि उसका वयस्क बेटा या बेटी किसी अलग राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी स्वतंत्र सोच रखने और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। ऐसे में किसी अभिभावक को उनके बच्चों के विचारों के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता।
अपने परिवार का उदाहरण देकर समझाया पक्ष
मुख्यमंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए अपने परिवार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि उनका बेटा एक वकील बनता है और किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष रखता है, जिससे वे व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि दोनों की विचारधारा एक जैसी है। उन्होंने कहा कि वयस्क होने के बाद बच्चों के निर्णय और राजनीतिक विचार उनके अपने होते हैं और उन्हें उनके माता-पिता से जोड़ना उचित नहीं है।
नारों से असहमति, लेकिन संवाद की बात
हिमंता सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनकी मुलाकात दिबिसा महंत से होती है तो वह व्यक्तिगत रूप से उनसे इस विषय पर चर्चा करेंगे और समझाने की कोशिश करेंगे कि इस प्रकार के नारे उचित नहीं हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है और इसे राजनीतिक हमला करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
NEET विवाद बना राष्ट्रीय मुद्दा
हाल के दिनों में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। कई जगहों पर परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की गई। गुवाहाटी का प्रदर्शन भी इसी क्रम का हिस्सा था, जहां प्रदर्शनकारियों ने कथित परीक्षा गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मंत्री की ओर से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच मंत्री केशव महंत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है, जबकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बयान यह संकेत देता है कि सरकार इस मामले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राजनीतिक विचारों की आजादी के नजरिए से देख रही है। वहीं, आने वाले दिनों में इस विवाद पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना बनी हुई है।
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