NEET Paper Leak : NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA के नए अपग्रेड किए गए परिसर का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने की बात कही है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ यह देखना चाहती है कि परीक्षा सुधारों के तहत तैयार की गई व्यवस्था जमीन पर किस तरह काम कर रही है और क्या इसमें किए गए बदलाव प्रभावी रूप से लागू हुए हैं।
नई व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है या नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा सुधारों के वास्तविक क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। पीठ यह देखना चाहती है कि NTA में नई प्रणाली सिर्फ दस्तावेजों में मौजूद है या वास्तव में उसे लागू भी किया गया है। इसके साथ ही अदालत व्यवस्था के संचालन, उपलब्ध संसाधनों और पर्याप्त कर्मचारियों की स्थिति को भी समझना चाहती है। संभावित निरीक्षण का उद्देश्य जमीनी स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है।

स्थायी संस्थागत ढांचे की जरूरत पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के संचालन के लिए NTA में स्थायी संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने स्थायी ढांचे, पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों और अलग-अलग कार्यात्मक वर्टिकल विकसित करने की जरूरत पर चर्चा की। पीठ के अनुसार, परीक्षा संचालन को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए संस्थागत विशेषज्ञता और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है।
डेपुटेशन पर निर्भरता सीमित करने की बात
सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से NTA के मानव संसाधन ढांचे पर भी ध्यान दिया गया। पीठ ने संकेत दिया कि महत्वपूर्ण परीक्षा एजेंसी को लंबे समय तक डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय अपना स्थायी कार्यबल विकसित करना चाहिए। इससे परीक्षा संचालन, सुरक्षा, तकनीकी प्रबंधन और प्रशासनिक कामकाज में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

अस्थायी उपायों के बजाय व्यापक सुधार जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए केवल तात्कालिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक संस्थागत सुधारों की जरूरत बताई। परीक्षा संचालन से लेकर तकनीकी व्यवस्था, सुरक्षा प्रोटोकॉल और मानव संसाधन तक कई क्षेत्रों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अदालत की सुनवाई में अब इन सुधारों की वास्तविक स्थिति और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नंदन नीलेकणि समिति की प्रगति पर जानकारी
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की प्रगति की जानकारी दी। इंफोसिस के सह-संस्थापक नीलेकणि के नेतृत्व वाली समिति परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधारों को लेकर काम कर रही है। समिति ने पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति से जुड़े सदस्यों के साथ भी विचार-विमर्श किया है।

सितंबर के अंत तक अंतरिम रिपोर्ट की उम्मीद
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक सौंप सकती है। समिति से NEET और अन्य परीक्षा प्रक्रियाओं में तकनीकी तथा संस्थागत सुधारों को लेकर सुझाव देने की उम्मीद है। अदालत अब समिति की प्रगति और उसकी सिफारिशों को लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर भी नजर रखेगी।
दो सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल होगा
सुप्रीम कोर्ट ने समिति की प्रगति से संबंधित विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए संबंधित अधिकारी को दो सप्ताह का समय दिया गया है। अदालत के सामने हलफनामे के जरिए समिति के अब तक के काम, हुई बैठकों और परीक्षा सुधारों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी रखी जाएगी।

कथित पेपर लीक मामले की CBI जांच जारी
NEET-UG 2026 में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI भी कर रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त शिकायत के आधार पर CBI ने मई 2026 में मामला दर्ज किया था। जांच का उद्देश्य कथित अनियमितताओं की प्रकृति, दायरे और इसमें शामिल व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका का पता लगाना है।
अब सुधारों के जमीनी असर पर अदालत की नजर
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में परीक्षा सुधारों की घोषणा के साथ उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर भी फोकस बढ़ गया है। NTA के परिसर, स्थायी कर्मचारियों, संस्थागत ढांचे और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की स्थिति अदालत के लिए अहम है। आने वाली कार्यवाही में केंद्र के हलफनामे, समिति की रिपोर्ट और NTA की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी के आधार पर परीक्षा सुधारों की प्रगति पर आगे चर्चा हो सकती है।










