Iran UN Vote: अमेरिका के प्रस्ताव पर रूस-चीन का वीटो, 11 वोटों के बावजूद नहीं पास हुआ प्रस्ताव

ईरान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के प्रस्ताव को 11 सदस्यों का समर्थन मिला, लेकिन रूस और चीन के वीटो से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने से जुड़ा था। अब यूएन में ईरान मुद्दे पर मतभेद और गहराए हैं।

Iran UN Vote

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 18, 2026

Iran UN Vote : ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लागू संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को लेकर सुरक्षा परिषद में अमेरिका, रूस और चीन के बीच मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आए हैं। गुरुवार को रूस और चीन ने अमेरिका के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिसमें ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक साल बढ़ाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला, जबकि दो स्थायी सदस्यों के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका।

ईरान पर लागू हैं कई तरह के प्रतिबंध

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा प्रतिबंधों के तहत ईरान की विदेशों में मौजूद कुछ संपत्तियों को फ्रीज करने, हथियारों से जुड़े लेनदेन पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों पर पाबंदियां शामिल हैं। UN के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिबंधों की निगरानी के लिए बनाए गए विशेषज्ञ पैनल का मौजूदा कार्यकाल 26 सितंबर 2026 को समाप्त होना था। पैनल का काम प्रतिबंधों के अनुपालन और संभावित उल्लंघनों से जुड़ी जानकारी जुटाना था।

अमेरिका ने निगरानी जारी रखने का प्रस्ताव दिया

अमेरिका की ओर से पेश प्रस्ताव का उद्देश्य विशेषज्ञों के पैनल को एक और साल काम करने की अनुमति देना था। वॉशिंगटन का तर्क था कि स्वतंत्र विशेषज्ञ प्रतिबंधों के संभावित उल्लंघनों और ईरान से जुड़े प्रतिबंधित सहयोग की जानकारी सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पैनल खत्म होने से प्रतिबंधों की निगरानी की स्वतंत्र व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

रूस और चीन ने क्यों किया वीटो?

रूस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत वासिली नेबेंजिया ने प्रस्ताव को कानूनी आधार से रहित बताया। रूस और चीन लंबे समय से ईरान पर लागू प्रतिबंधों तथा उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर पश्चिमी देशों से अलग रुख रखते हैं। मॉस्को का कहना है कि 2025 में ‘स्नैपबैक’ प्रक्रिया के जरिए प्रतिबंधों की वापसी की वैधता पर ही सवाल है। इसी आधार पर रूस ने अमेरिकी प्रस्ताव का विरोध किया।

ईरान ने रूस और चीन के फैसले का स्वागत किया

ईरान ने रूस और चीन के वीटो का स्वागत किया है। तेहरान का रुख है कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल उसके खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि ईरान पर लागू प्रतिबंधों की निगरानी के लिए विश्वसनीय और स्वतंत्र व्यवस्था जरूरी है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब सुरक्षा परिषद की कार्यवाही में भी दिखाई दे रहे हैं।

फ्रांस ने प्रतिबंधों को बताया जरूरी

फ्रांस सहित यूरोपीय देशों ने ईरान पर लागू प्रतिबंधों को बनाए रखने का समर्थन किया है। फ्रांस का कहना है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान को उसके परमाणु दायित्वों और 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी प्रतिबद्धताओं के पालन के लिए दबाव में रखना है। फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने 2025 में ‘स्नैपबैक’ प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद पुराने UN प्रतिबंध दोबारा लागू हुए। ईरान इन कदमों की वैधता को स्वीकार नहीं करता।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर बनी चिंता

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बनी हुई है। अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य संघर्ष के बाद ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों और उसके परमाणु भंडार को लेकर स्थिति पर सवाल उठे हैं। IAEA की निगरानी और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार की स्थिति इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। ऐसे में प्रतिबंधों की निगरानी को लेकर सुरक्षा परिषद का फैसला और अहम माना जा रहा है।

आगे निगरानी के लिए तलाशे जा सकते हैं विकल्प

विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ने के बाद ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर चर्चा हो सकती है। यूरोपीय देश स्वतंत्र निगरानी के दूसरे तरीकों पर विचार कर सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर अमेरिका तथा उसके सहयोगियों और रूस-चीन के बीच मतभेद अभी कायम हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा UN सुरक्षा परिषद में कूटनीतिक तनाव का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

Read More : CG News : छत्तीसगढ़ में लाखों दीयों से बना रिकॉर्ड, आशीर्वाद का दीया गोल्डन बुक में दर्ज