Nandigram Bypoll : तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे नाम और चुनाव चिन्ह विवाद के बीच नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी के गुट की ओर से नंदीग्राम से उम्मीदवार घोषित की गईं संचिता प्रधान ने शुक्रवार, 18 सितंबर को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह मुलाकात कोलकाता स्थित नबान्न सचिवालय में हुई। बैठक के बाद संचिता प्रधान के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कुछ दिन पहले ही घोषित हुई थीं उम्मीदवार
संचिता प्रधान को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था। अब उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात ने चुनावी घटनाक्रम में एक नया मोड़ जोड़ दिया है। हालांकि, अभी तक संचिता प्रधान की ओर से बीजेपी में शामिल होने या किसी दूसरे राजनीतिक गुट का समर्थन करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए उनके अगले कदम को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

नंदीग्राम से जुड़ा है ममता और शुभेंदु का पुराना चुनावी मुकाबला
नंदीग्राम सीट का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर नंदीग्राम से मैदान में उतरे थे। इसी सीट से ममता बनर्जी ने भी चुनाव लड़ा था। मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
2026 में भी शुभेंदु ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी एक बार फिर नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। बाद में उन्होंने यह सीट छोड़ दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी। नंदीग्राम में होने वाले इस उपचुनाव के चलते पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। अब संचिता प्रधान की मुलाकात ने इस सीट को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

बीजेपी ने हासिरानी रथ को बनाया उम्मीदवार
शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद बीजेपी ने यहां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। हासिरानी रथ, शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना के कारण भी नंदीग्राम सीट राजनीतिक चर्चा में रही है।
6 अक्टूबर को प्रस्तावित है नंदीग्राम उपचुनाव
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित थी। उपचुनाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और गुटों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। ऐसे में अब चुनावी मुकाबले के साथ उम्मीदवारों की स्थिति पर भी नजर बनी हुई है।

कई दलों ने मैदान में उतारे अपने उम्मीदवार
नंदीग्राम सीट पर रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान और सीपीआई की तरफ से गोपाल गिरी चुनाव मैदान में हैं। इस तरह नंदीग्राम में उपचुनाव के दौरान कई राजनीतिक दलों और TMC से जुड़े अलग-अलग गुटों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर आयोग का आदेश
नंदीग्राम उपचुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद भी महत्वपूर्ण हो गया है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers and Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने दोनों पक्षों के लिए अलग पहचान तय करने की प्रक्रिया शुरू की।

दोनों गुटों का TMC पर अलग-अलग दावा
TMC के दोनों गुट पार्टी पर अपना अधिकार होने का दावा कर रहे हैं। रितब्रता बनर्जी के गुट की ओर से विधायकों की संख्या को अपने दावे का आधार बताया गया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी का गुट भी अपने संगठनात्मक समर्थन और संख्या बल के आधार पर पार्टी पर अधिकार का दावा कर रहा है। चुनाव आयोग ने विवाद के अंतिम समाधान तक अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
संचिता प्रधान के अगले कदम पर टिकी नजरें
फिलहाल संचिता प्रधान की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद नंदीग्राम का राजनीतिक घटनाक्रम और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, मुलाकात अपने आप में किसी राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती। संचिता प्रधान के बीजेपी में जाने या किसी अन्य गुट का समर्थन करने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में अब उनके अगले कदम और चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।
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