NEET Paper Leak: नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों ने देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है। इस गंभीर मुद्दे पर अब राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक खतरनाक ‘ट्रेंड’ करार दिया है।
मंगलवार (12 मई) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अब देश में वोटर लिस्ट से लेकर परीक्षा के प्रश्नपत्रों तक, हर जगह ‘लीक’ की समस्या घर कर गई है।
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“विकसित भारत” और शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष
कपिल सिब्बल ने सरकार के ‘विकसित भारत’ के विजन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हम विकसित भारत की ओर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन क्या हम वाकई ‘शिक्षित भारत’ हैं? उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जिस तरह की शिक्षा व्यवस्था आज दी जा रही है, वह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
सिब्बल ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2016, 2021, 2024 और अब 2026 में भी पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने सवाल पूछा कि आखिर इस निरंतर विफलता का जिम्मेदार कौन है? उन्होंने पुराने व्यापम घोटाले का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उस मामले में किसी की जवाबदेही तय हुई या किसी का इस्तीफा लिया गया?
मन की बात और राजनीतिक जिम्मेदारी
सांसद सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों के साथ ‘मन की बात’ के जरिए यह संवाद करना चाहिए कि आखिर ये पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। उन्होंने संदेह जताया कि जो पेपर लीक पकड़े गए वे तो सामने हैं, लेकिन उन परीक्षाओं का क्या जिनके लीक पकड़े ही नहीं जाते?
सिब्बल ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए उन राज्यों की सूची गिनाई जहां पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने कहा: “बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड—ऐसा क्यों है कि अधिकतर बीजेपी शासित राज्यों में ही पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं? क्या छात्रों के प्रति इनकी कोई विशेष ‘दिलचस्पी’ है?”
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कपिल सिब्बल ने इस पूरी प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंपी गई?
सिब्बल ने कहा कि छात्र सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, जिनमें गरीब परिवारों के बच्चे भी शामिल होते हैं। जब पेपर लीक होता है, तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो सरकार शासन-प्रशासन और परीक्षाओं को ठीक से संचालित नहीं कर सकती, उसे देश चलाने का हक नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संबंधित सरकारों के शिक्षा मंत्रियों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।










