Neeraj Chopra: ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) का मंच एक बार फिर भारतीय एथलेटिक्स के लिए गौरवशाली क्षण लेकर आया, जब देश के स्टार जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंक खिलाड़ी) नीरज चोपड़ा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल (रजत पदक) अपने नाम किया। हालांकि, इस बड़ी सफलता के बाद नीरज चोपड़ा ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले के दौरान अपने मन की बात साझा करते हुए बताया कि जब भी वे भाला फेंकने के लिए रन-अप ले रहे थे, तब-तब वे अंदर से डरा हुआ महसूस कर रहे थे।
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चोट के डर और शरीर को नियंत्रित करने की चुनौती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी इस मानसिक स्थिति के बारे में खुलकर बात करते हुए नीरज चोपड़ा ने कहा कि उनकी नजर में सबसे बड़ा अंतर तब आता है जब खिलाड़ी सौ प्रतिशत फिट होता है। पूरी फिटनेस के दौरान एथलीट यह सोचता है कि वह किसी भी कठिनाई और चुनौती को अपनी ताकत से पार कर लेगा।
मगर, जब शरीर में पुरानी चोटें या उनके उभरने का डर रहता है, तो वह चोट आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। नीरज ने स्वीकार किया कि वे आज भी मैदान पर उतरकर डरे हुए थे। यही कारण था कि वे अपनी गति को बहुत ज्यादा तेज नहीं भागने दे रहे थे, बल्कि अपने शरीर और थ्रो को पूरी तरह से नियंत्रित रखना चाहते थे ताकि किसी अनचाही शारीरिक समस्या से बचा जा सके।
कमबैक और ठंडे मौसम को लेकर क्या बोले नीरज?
लंबे समय बाद राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी वापसी पर बात करते हुए नीरज चोपड़ा ने कहा कि उनका कमबैक सफर अब तक संतोषजनक और अच्छा रहा है। उन्होंने ठंडे मौसम की चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि वे ठंडी परिस्थितियों में अपने खेल का शत-प्रतिशत प्रदर्शन करने में थोड़ा असहज महसूस करते हैं, क्योंकि आखिरकार वे एक भारतीय हैं और गर्म जलवायु के आदी हैं।
इसके बावजूद, पोडियम (विजेता मंच) पर दोबारा खड़े होकर देश के लिए मेडल जीतना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। उन्होंने माना कि उन्हें धीरे-धीरे अपनी कड़ी मेहनत और निरंतरता का सकारात्मक फल मिल रहा है। आपको बता दें कि नीरज चोपड़ा पूरे आठ साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने साल 2018 के खेलों में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था, जबकि साल 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गंभीर चोट के कारण वे हिस्सा नहीं ले पाए थे।
भारत के नाम सिल्वर और ब्रॉन्ज
मेंस जैवलिन थ्रो स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। श्रीलंका के प्रतिभावान खिलाड़ी रुमेश पाथिरागे ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 89.75 मीटर की दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
वहीं, दूसरी ओर नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर की दूरी के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। इस स्पर्धा का ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) भी भारत के ही खाते में आया, जहां एक अन्य भारतीय होनहार खिलाड़ी यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर तीसरा स्थान हासिल किया। डर और तमाम शारीरिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के खेल इतिहास में एक बार फिर स्वर्णिम अध्याय लिख गया है।
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