Mojtaba Khamenei: ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा खामेनेई ने पदभार संभालने के बाद अपने पहले आधिकारिक बयान में पड़ोसी मुस्लिम देशों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने गुरुवार को जारी अपने बयान में क्षेत्रीय देशों से स्पष्ट रूप से पूछा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ जारी इस भीषण जंग में वे किसके साथ खड़े हैं। मुज्तबा ने कड़े लहजे में कहा कि पड़ोसी देशों को अब अपना रुख स्पष्ट करना होगा कि वे ईरान पर हमला करने वालों और ईरानी जनता के हत्यारों का साथ दे रहे हैं या फिर क्षेत्र की शांति के पक्षधर हैं।
पिता की विरासत और शहादत का बदला लेने का संकल्प
उल्लेखनीय है कि मुज्तबा के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की हाल ही में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मृत्यु हो गई थी। ईरान के इतिहास में यह पहली बार है जब सत्ता पिता से सीधे बेटे के हाथ में आई है। मुज्तबा ने भावुक होते हुए कहा कि जिस आसन पर इमाम खुमैनी और उनके पिता शहीद खामेनेई बैठते थे, उस पर बैठना उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने देश की जनता को आश्वस्त किया कि वे केवल अपने पिता की शहादत का ही नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के खून की बूंद का बदला लेंगे।
विदेशी सैन्य अड्डों को बंद करने का अल्टिमेटम
मुज्तबा खामेनेई ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने पड़ोसी देशों को सलाह दी कि वे अपने यहाँ मौजूद विदेशी सैन्य अड्डों को तुरंत बंद कर दें। उन्होंने तर्क दिया कि हालिया हमलों ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका का सुरक्षा और शांति का दावा महज एक सफेद झूठ था। खामेनेई ने स्पष्ट किया कि दुश्मन ने पिछले कई वर्षों से पड़ोसी देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी और युद्ध की नई रणनीति
युद्ध की स्थिति पर चर्चा करते हुए सुप्रीम लीडर ने साफ कर दिया कि ईरान की जंग जनता की इच्छा के अनुरूप जारी रहेगी। उन्होंने घोषणा की कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को बंद रखा जाएगा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है। उन्होंने हिजबुल्लाह, यमन के हूतियों और इराकी लड़ाकों की बहादुरी की प्रशंसा की और कहा कि ‘प्रतिरोध का मोर्चा’ दुश्मन को करारा जवाब दे रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में केवल उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है जहाँ से ईरान पर हमले हुए थे।
खाड़ी देशों के सामने खड़ी हुई बड़ी कूटनीतिक चुनौती
मुज्तबा खामेनेई के इस बयान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों को धर्मसंकट में डाल दिया है। इन देशों में अमेरिका के मजबूत सैन्य अड्डे हैं जो उन्हें क्षेत्रीय खतरों से सुरक्षा की गारंटी देते हैं। ईरान के अल्टिमेटम का पालन करने का अर्थ होगा अमेरिका से सीधे संबंध तोड़ना, जो इन देशों के लिए बड़ा आर्थिक और सैन्य जोखिम हो सकता है। दूसरी ओर, ईरान के बढ़ते हमलों और आक्रामक रुख ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिलहाल, ये देश ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपना रहे हैं।
ईरान का दावा: हम विस्तारवादी नहीं, केवल आत्मरक्षक हैं
अपने संबोधन के अंत में मुज्तबा ने विश्व समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की कि ईरान किसी भी देश को अपना उपनिवेश बनाने या अपना वर्चस्व स्थापित करने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने सभी पड़ोसियों के साथ एकता और गर्मजोशी भरे संबंधों के लिए तैयार हैं।’ हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस दोस्ती की पहली शर्त ईरान की संप्रभुता का सम्मान और दुश्मन देशों की मदद बंद करना है।










