Mohan Bhagwat: मोहन भागवत का जनसंख्या पर बड़ा बयान, हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने की सलाह

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में जनसंख्या नीति पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि जिस समाज की प्रजनन दर 2.1 से नीचे गिर जाती है, वह धीरे-धीरे विलुप्त हो जाता है। उन्होंने वैज्ञानिक रिसर्च का हवाला देते हुए हर परिवार में तीन बच्चे होने की वकालत की है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 17, 2026

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदू समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज को संगठित, सशक्त और जागरूक होने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि हमें किसी से प्रत्यक्ष खतरा नहीं है, लेकिन वर्तमान वैश्विक और आंतरिक परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना अनिवार्य है।

जनसंख्या असंतुलन पर चिंता: “तीन बच्चों” का फॉर्मूला और अस्तित्व की रक्षा

हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. भागवत ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू परिवारों में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। वैज्ञानिकों और जनसांख्यिकीय विशेषज्ञों का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि जिस समाज में प्रजनन दर तीन से कम होती है, वह समाज भविष्य में धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को यह समझाने की आवश्यकता पर बल दिया कि विवाह का मूल उद्देश्य सृष्टि का विस्तार और कर्तव्य बोध होना चाहिए, न कि केवल व्यक्तिगत सुख।

घुसपैठ और मतांतरण के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ की नीति

आरएसएस प्रमुख ने अवैध घुसपैठ और लालच देकर कराए जा रहे मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ रही घुसपैठ को रोकने के लिए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ की प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि घुसपैठियों को किसी भी प्रकार का रोजगार न दें। साथ ही, उन्होंने ‘घर वापसी’ के अभियान को तेज करने और जो लोग सनातन धर्म में लौट रहे हैं, उन्हें पूरे सम्मान के साथ अपनाने और उनका ध्यान रखने का संदेश दिया।

मातृशक्ति का सम्मान: महिला को ‘अबला’ नहीं ‘असुर मर्दिनी’ मानें

परिवार और समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि मातृशक्ति ही भारतीय परंपरा का आधार है। उन्होंने पश्चिमी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि भारत में महिलाओं को सौंदर्य की दृष्टि से नहीं, बल्कि वात्सल्य और ममता की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने की वकालत की और कहा कि स्त्री शक्ति को ‘अबला’ समझने की भूल न करें, वह साक्षात ‘असुर मर्दिनी’ का स्वरूप है।

भेदभाव मुक्त समाज और कानून का पालन

सामाजिक भेदभाव को दूर करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी एक ही मातृभूमि के पुत्र हैं और मनुष्य होने के नाते समान हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ जो कुरीतियां और भेदभाव आ गए हैं, उन्हें सनातन दर्शन के माध्यम से समाप्त करना होगा। यूजीसी गाइडलाइंस और अन्य कानूनी विषयों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए सर्वोपरि है। यदि कानून में कोई त्रुटि है, तो उसे बदलने के संवैधानिक उपाय मौजूद हैं, लेकिन जातिगत झगड़े समाज को कमजोर करते हैं।

विदेशी साजिशों से सावधान: भारत बनेगा विश्व का मार्गदर्शक

डॉ. भागवत ने चेतावनी दी कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठी कुछ विदेशी शक्तियां भारत की आंतरिक सद्भावना को बिगाड़ने की योजना बना रही हैं। उन्होंने समाज की ‘सज्जन शक्ति’ से अपील की कि वे अविश्वास को समाप्त करें और एक-दूसरे के दुख-दर्द में शामिल हों। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत निकट भविष्य में विश्व का मार्गदर्शन करेगा क्योंकि दुनिया की अनेक समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति और समन्वय की सोच में ही निहित है।

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