Akshay Pratap Singh FIR : MLC अक्षय प्रताप सिंह पर FIR, भानवी कुमारी ने लगाया ₹5 करोड़ की जालसाजी का आरोप

यूपी की राजनीति में भूचाल! भानवी कुमारी सिंह की शिकायत पर एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। ₹5 करोड़ की फर्म और संपत्तियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने के इस सनसनीखेज आरोप ने हजरतगंज से लेकर प्रतापगढ़ तक सनसनी फैला दी है।

Akshay Pratap Singh FIR

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 15, 2026

Akshay Pratap Singh FIR : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का हजरतगंज इलाका उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब प्रतापगढ़ से एमएलसी (MLC) अक्षय प्रताप सिंह और तीन अन्य व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। यह कानूनी कार्रवाई भानवी कुमारी द्वारा दी गई एक औपचारिक लिखित शिकायत के बाद की गई है। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है, बल्कि इसमें राज्य के रसूखदार नाम शामिल होने के कारण शासन-प्रशासन की पैनी नजर इस पर बनी हुई है।

MLC अक्षय प्रताप सिंह सहित चार नामजद: पुलिस ने शुरू की वैधानिक कार्रवाई

हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस एफआईआर में केवल अक्षय प्रताप सिंह ही नहीं, बल्कि उनके तीन अन्य सहयोगियों को भी मुख्य रूप से नामजद किया गया है। जानकारी के अनुसार, अनिल कुमार सिंह, रामदेव यादव और रोहित कुमार सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। भानवी कुमारी ने अपनी तहरीर में इन चारों व्यक्तियों पर सुनियोजित तरीके से साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और अब कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

5 करोड़ की संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र: फर्जी हस्ताक्षर और जाली दस्तावेजों का खेल

इस पूरे विवाद की जड़ एक पार्टनरशिप फर्म और उसकी बेशकीमती संपत्तियां हैं। भानवी कुमारी का आरोप है कि अक्षय प्रताप सिंह और उनके साथियों ने मिलकर करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की फर्म की संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश की। शिकायत में विस्तार से बताया गया है कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर दस्तावेजों में हेराफेरी की और जाली कागजात तैयार किए। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन संपत्तियों को हथियाने के लिए भानवी कुमारी के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए, ताकि कागजी कार्रवाई में फर्म की मालिकियत या सहमति को बदला जा सके।

साक्ष्यों की सघन जांच में जुटी पुलिस: निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कमान संभाल ली है। लखनऊ पुलिस का कहना है कि वर्तमान में फर्म से जुड़े सभी दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और हस्ताक्षरों के नमूनों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस केस में शामिल सभी पक्षों को जल्द ही बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा। शुरुआती जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही अगली कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस प्रशासन पर इस समय निष्पक्ष जांच का भारी दबाव है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर प्रतापगढ़ की प्रभावशाली राजनीति से जुड़ा है।

राजनीतिक माहौल गर्म: आरोपियों की ओर से चुप्पी बरकरार

जैसे ही अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ एफआईआर की खबर फैली, प्रतापगढ़ से लेकर लखनऊ तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। अक्षय प्रताप सिंह क्षेत्र के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं, ऐसे में उन पर लगे जालसाजी के आरोपों ने उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर अभी तक अक्षय प्रताप सिंह या उनके किसी भी सहयोगी की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या सफाई सामने नहीं आई है। आरोपी पक्ष फिलहाल इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि पुलिस ने साफ कर दिया है कि कानून अपना काम करेगा और साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपियों की गिरफ्तारी या अन्य कदम उठाए जाएंगे।

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