Middle East War: पीएम मोदी ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, महंगाई और सुरक्षा पर मंथन

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 25 मार्च 2026 को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक में कच्चे तेल की आपूर्ति, महंगाई के खतरे और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा होगी। जहाँ सरकार ने 7 एम्पावर्ड ग्रुप बनाए हैं, वहीं विपक्ष ने विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 25, 2026

Middle East War: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ा त्रिकोणीय संघर्ष अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी तपिश भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुँचने लगी है। इस वैश्विक आपातकाल को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आज यानी बुधवार, 25 मार्च 2026 को शाम 5 बजे संसद भवन में एक विशेष सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) आमंत्रित की है। इस उच्च-स्तरीय चर्चा का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संकट के समय सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकजुटता का प्रदर्शन करना है।

ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती और आम आदमी पर महंगाई की मार

प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। भारत अपनी कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि युद्ध की आग और भड़कती है, तो तेल की आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधा आ सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए ‘रेड सिग्नल’ है। यदि यह समुद्री मार्ग प्रभावित होता है, तो ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर आम नागरिक की रसोई के बजट और परिवहन लागत पर पड़ेगा।

विपक्ष का रुख और राहुल गांधी की बैठक से अनुपस्थिति

जहाँ एक तरफ सरकार एकजुटता की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के तेवर कड़े नजर आ रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने केरल में अपने पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए इस चर्चा से दूरी बनाई है। हालांकि, बैठक से पहले ही उन्होंने सरकार की विदेश नीति (Foreign Policy) पर तीखा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने इसे ‘व्यक्तिगत नीति’ करार देते हुए आरोप लगाया कि आज भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हुई है और देश की विदेश नीति केवल अमेरिका और इजरायल के फैसलों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।

सरकार का ‘प्लान बी’ और एम्पावर्ड ग्रुप्स का गठन

अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच मोदी सरकार ने अपनी रणनीतिक तैयारी (Strategic Preparedness) का खाका पेश किया है। प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि सरकार ने स्थिति की पल-पल की निगरानी के लिए 7 अलग-अलग ‘एम्पावर्ड ग्रुप’ (अधिकार प्राप्त समूह) गठित किए हैं। इन विशेष टीमों की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि देश में एलपीजी, उर्वरक और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति (Uninterrupted Supply) बनी रहे। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि वैश्विक युद्ध का असर भारत के घरेलू बाजार और किसानों की जरूरतों पर न पड़े।

खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा और सुरक्षा रणनीति

इस संकट काल में खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में प्रवासी भारतीयों (Indian Diaspora) को सुरक्षित निकालने और उनकी मदद के लिए विशेष ‘इवैक्युएशन प्लान’ पर चर्चा हो सकती है। आरजेडी सांसद मीसा भारती सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि वे बैठक में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले तथ्यों का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही विपक्ष अपनी साझा रणनीति का खुलासा करेगा।

निष्कर्ष: वैश्विक कुरुक्षेत्र में भारत की भूमिका

बुधवार शाम को होने वाली यह चर्चा न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश है कि विपक्ष को भरोसे में लेकर एक ऐसी राष्ट्रीय नीति (National Policy) तैयार की जाए, जिससे देश के आर्थिक हितों की रक्षा हो सके और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ को न्यूनतम किया जा सके। पूरा देश अब संसद भवन से निकलने वाले फैसलों की प्रतीक्षा कर रहा है।