Mayawati PM Modi : मायावती का केंद्र पर निशाना,  पीएम की अपील आर्थिक संकट की बड़ी चेतावनी

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ईंधन बचाने और सोना न खरीदने की अपील पर मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूछा कि अगर देश 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन रहा है, तो जनता पर ऐसी पाबंदियां क्यों? क्या पश्चिम एशिया के युद्ध के बहाने सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपा रही है?

Mayawati PM Modi

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

Mayawati PM Modi : देश में गहराते आर्थिक संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जनता से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। इस अपील पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मायावती का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की अर्थव्यवस्था केवल पेट्रोलियम पदार्थों के संकट से ही नहीं, बल्कि एक व्यापक और गंभीर आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ी है।

वैश्विक युद्ध और भारत पर बढ़ता आर्थिक दबाव

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी चिंता साझा करते हुए कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की अनिश्चितता ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध कब समाप्त होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है और इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। मायावती के अनुसार, ऊर्जा संकट और विदेशी मुद्रा के गिरते स्तर के कारण ही प्रधानमंत्री को देशवासियों से संयम बरतने का अनुरोध करना पड़ा है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक खतरे की घंटी करार दिया है।

गरीबों और मेहनतकशों के पास अब खोने को कुछ नहीं

बसपा प्रमुख ने देश की वर्तमान सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय जनता पहले से ही समस्याओं के बोझ तले दबी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना काल के बाद से ही देश का मेहनतकश वर्ग रोजी-रोटी के गहरे संकट से जूझ रहा है। मायावती ने केंद्र सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि जनता पहले ही काफी संयम बरत चुकी है और अब उनके पास न तो और अधिक धैर्य रखने की शक्ति बची है और न ही खोने के लिए कुछ बचा है। महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी की कमर पहले ही तोड़ दी है।

सरकार से राहत और ठोस कदम उठाने की मांग

मायावती ने केवल आलोचना ही नहीं की, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों को जनहित में कार्य करने की सलाह भी दी। उन्होंने सरकारों से पुरजोर अपील की कि ऐसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में गरीब परिवारों को बेसहारा न छोड़ा जाए। उन्होंने मांग की कि सरकारें केवल अपील करने तक सीमित न रहें, बल्कि गरीबों को प्रत्यक्ष राहत देने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं। मायावती ने जोर देकर कहा कि जब तक आम जनता को बुनियादी सुविधाओं और महंगाई से राहत नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी अपीलों का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा।

आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार की आवश्यकता

मायावती के इस बयान ने देश की राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। उनके अनुसार, सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर पेट्रोलियम पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया गया और विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आम जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। बसपा प्रमुख ने साफ किया कि उनकी पार्टी हमेशा दबे-कुचले और गरीब तबके के हितों के लिए आवाज उठाती रहेगी और सरकार को उनकी जवाबदेही याद दिलाती रहेगी।

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