UP News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा एक हालिया कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के विरुद्ध की गई अभद्र और अशोभनीय टिप्पणी ने देशव्यापी विवाद का रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में इस बयान के खिलाफ ब्राह्मणों का भारी विरोध और प्रदर्शन जारी है। हालांकि, चौतरफा दबाव और दर्ज हुई एफआईआर के बाद भाटी ने वीडियो संदेश के जरिए माफी मांगी है, लेकिन समाज का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस पूरे प्रकरण में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी दखल दिया है। उन्होंने न केवल सपा प्रवक्ता के बयानों की निंदा की, बल्कि सपा मुखिया अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रायश्चित करने की नसीहत दी है।
मायावती ने अखिलेश की चुप्पी को बताया गंभीर
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि सपा प्रवक्ता की अभद्र बयानबाजी और आपत्तिजनक टिप्पणियों के कारण हर तरफ उपजा आक्रोश स्वाभाविक है। मायावती के अनुसार, मुकदमे दर्ज होने के बावजूद यह मामला इसलिए तूल पकड़ रहा है क्योंकि सपा का शीर्ष नेतृत्व इस पर खामोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी की इस चुप्पी ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है, जिससे समाज में असुरक्षा और नाराजगी की भावना और अधिक गहरी होती जा रही है।
मायावती ने सपा मुखिया को दी ‘पश्चाताप’ की नसीहत
मायावती ने सीधे तौर पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान और स्वाभिमान को जो गहरी चोट पहुंची है, उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि सपा मुखिया को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिए। बसपा प्रमुख का मानना है कि इस ताजा विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सपा का ‘जातिवादी चाल और चरित्र’ बदला नहीं है। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों की तरह अब ब्राह्मणों के प्रति भी सपा का विरोधी चेहरा जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
सर्वसमाज को उचित प्रतिनिधित्व का दावा
राजनीतिक हमले को जारी रखते हुए मायावती ने वर्तमान सरकार और समाजवादी पार्टी दोनों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज ब्राह्मण समाज में वर्तमान सत्ता के प्रति भी जबरदस्त नाराजगी है, जो किसी से छिपी नहीं है। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जहां सर्वसमाज का हित सुरक्षित रहता है। उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि बसपा ने ब्राह्मणों को न केवल पार्टी में बल्कि सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान और उचित भागीदारी व प्रतिनिधित्व दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी में ‘यूज़ एंड थ्रो’ की संस्कृति नहीं है, बल्कि यहां हर वर्ग को बराबरी का सम्मान मिलता है।
ब्राह्मण समाज की एकजुटता और सपा से निष्कासन की मांग
फिलहाल, ब्राह्मण संगठनों द्वारा लगातार अखिलेश यादव से मांग की जा रही है कि वे राजकुमार भाटी को पार्टी से तत्काल निष्कासित करें। समाज का कहना है कि महज एक वीडियो माफी से उनके स्वाभिमान की भरपाई नहीं हो सकती। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक की अहमियत को देखते हुए मायावती का यह बयान सपा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या समाजवादी पार्टी मायावती की सलाह मानकर बैकफुट पर आती है या फिर यह राजनीतिक घमासान आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।










