Mark Tully Death: पूर्व पत्रकार मार्क टली का निधन, 90 साल की उम्र में दिल्ली में अंतिम सांस

वरिष्ठ पत्रकार Mark Tully का 90 वर्ष की उम्र में दिल्ली में निधन। पाकिस्तान के भुट्टो से लेकर इंदिरा गांधी तक की कवरेज करने वाले पत्रकार के निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर। उनके जीवन और पत्रकारिता के अनमोल योगदान को जानें।

पूर्व पत्रकार मार्क टली का निधन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 25, 2026

Mark Tully Death: वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का 25 जनवरी 2026 को निधन हो गया। 90 वर्षीय टली ने नई दिल्ली में अंतिम सांस ली। पत्रकारिता जगत में उनका नाम उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल है जिन्होंने दक्षिण एशिया के कई ऐतिहासिक घटनाक्रमों को करीब से देखा और दुनिया तक पहुँचाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के मुकदमे से लेकर भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या तक की रिपोर्टिंग उन्होंने की थी।

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स्वतंत्र पत्रकारिता तक का सफर

1972 से 1994 तक वे दिल्ली संवाददाता रहे और इस दौरान भारत तथा दक्षिण एशिया से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया। 2009 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनके करियर में मेहनत के साथ-साथ किस्मत और ईश्वर का भी योगदान रहा।

विनम्रता और पत्रकारिता का दृष्टिकोण

टली का मानना था कि पत्रकारिता में घमंड सबसे बड़ा पाप है। उन्होंने कहा था कि किसी भी बड़ी खबर पत्रकार की नहीं होती, बल्कि वह उस घटना की कहानी होती है। भुट्टो की फांसी की रिपोर्टिंग को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह उनकी नहीं, बल्कि भुट्टो की कहानी थी।

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प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मार्क टली का जन्म कोलकाता के टॉलीगंज में हुआ था। उन्होंने दार्जिलिंग से स्कूलिंग की और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी हॉल से इतिहास और थियोलॉजी में मास्टर्स किया। शुरुआती दौर में उन्होंने फर्स्ट रॉयल ड्रैगून में काम किया और बाद में एबेफील्ड सोसाइटी के रीजनल डायरेक्टर बने। पत्रकारिता में आने से पहले वे पादरी बनना चाहते थे और बुजुर्गों के लिए काम करने वाली संस्था में चार साल तक कार्यरत रहे।

हिंदी और भारतीय भाषाओं से जुड़ाव

हिंदी और भारतीय भाषाओं से जुड़ाव
हिंदी और भारतीय भाषाओं से जुड़ाव

टली का हिंदी प्रेम जगजाहिर था। उन्होंने हिंदी अखबार पढ़कर भाषा सीखी। हालांकि बचपन में उन्हें हिंदी और बंगाली सीखने से रोका गया था। उन्होंने खेद जताते हुए कहा था कि भारत में जब वे हिंदी बोलते थे तो लोग अंग्रेजी में जवाब देते थे, जो देश के लिए शर्मनाक है।

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आपातकाल और राजनीतिक अनुभव

आपातकाल के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने उन्हें जासूस कहा था। टली ने बताया कि मंत्री ने उनसे पूछा था कि खबरें कहाँ से मिलती हैं। उन्होंने जवाब दिया था कि पत्रकार और आकाशवाणी से। हिंदी सीखने पर भी उनसे सवाल किया गया था। संजय गांधी को उन्होंने कठोर स्वभाव वाला बताया, जबकि इंदिरा गांधी को कभी दोस्ताना और कभी रूखा व्यवहार करने वाली नेता के रूप में वर्णित किया।

अयोध्या और अन्य घटनाओं की रिपोर्टिंग

अयोध्या की घटना के दौरान टली मौके पर मौजूद थे। उन्होंने फैजाबाद से बीबीसी को सबसे पहले तोड़फोड़ की खबर भेजी। इस दौरान उन्हें स्थानीय लोगों ने घेर लिया था, लेकिन भारतीय पत्रकारों के साथ उन्होंने स्थिति का सामना किया।

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लेखन और सम्मान

मार्क टली ने कई किताबें लिखीं जिनमें No Full Stops in India, India’s Unending Journey और Non-Stop India शामिल हैं। उन्हें 2002 में नाइटहुड की उपाधि और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।