Manoj Jarange Patil: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। स्वास्थ्य में भारी गिरावट के बाद, डॉक्टरों की सलाह और शुभचिंतकों के आग्रह को मानते हुए उन्होंने पानी पीकर उपवास तोड़ा। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारी समर्थकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह साफ कर दिया गया है कि सरकार के साथ आरक्षण की यह लड़ाई अभी थमी नहीं है।
अनशन के दौरान बिगड़ी तबीयत
मनोज जरांगे पाटिल जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में लंबे समय से आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। लगातार कई दिनों तक उपवास के कारण उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा। बीते शनिवार रात उनकी स्थिति अचानक चिंताजनक हो गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल छत्रपति संभाजीनगर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने उनकी स्थिति की बारीकी से निगरानी की और उन्हें आवश्यक उपचार प्रदान किया। अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही मराठा समाज के हजारों समर्थकों में हलचल मच गई और राज्य भर से लोग उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रार्थना करने लगे।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
अनशन तोड़ने के बावजूद जरांगे पाटिल के तेवर तल्ख बने हुए हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने मराठा समाज से किए गए वादों को पूरा करने में कोताही बरती है। उनका मुख्य मुद्दा मराठा समुदाय को ‘कुनबी’ (Kunbi) प्रमाणपत्र जारी करना और आरक्षण के दायरे में लाना है। जरांगे का कहना है कि सरकार ने कई बार उच्च स्तरीय आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी भी प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है और आरक्षण के प्रति उदासीनता दिखा रही है।
“संघर्ष अभी बाकी है”
अनशन समाप्त करते हुए मनोज जरांगे पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह उपवास का अंत है, आंदोलन का नहीं। उन्होंने घोषणा की है कि मराठा समाज अब खोखले आश्वासनों के भरोसे बैठने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र रूप में जारी रखा जाएगा। फिलहाल अनशन समाप्त होने से महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन ने कुछ हद तक राहत महसूस की है, लेकिन यह शांति अस्थायी दिख रही है।
राजनीति और समाज के केंद्र में आरक्षण का मुद्दा
मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस आंदोलन ने राजनीतिक दलों के बीच भी एक नई बहस छेड़ दी है। मराठा समुदाय की भारी संख्या और उनके संगठित विरोध के कारण सरकार पर भारी दबाव है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस आंदोलन के अगले चरण के शुरू होने से पहले कोई समाधान निकाल पाती है, या राज्य को एक बार फिर बड़े जनांदोलन का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, जरांगे पाटिल का स्वास्थ्य स्थिर है और वे अपने अगले कदमों की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
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