West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की नीतियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के विरोध में वे कोलकाता के धर्मतला स्थित मेट्रो चैनल पर शुक्रवार से तीन दिवसीय धरने पर बैठी हैं। धरने के दूसरे दिन उन्होंने न केवल चुनावी मुद्दों पर बात की, बल्कि रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर भी केंद्र पर तीखा हमला बोला।
निर्वाचन नामावली विवाद और लोकतंत्र पर खतरा
बताते चले कि, ममता बनर्जी के इस धरने का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची में विसंगतियां और वोटरों के नाम हटाए जाने का मुद्दा है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि बंगाल में जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धरना केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। मेट्रो चैनल पर बने मंच से उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे बंगाल के लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं करेंगी।
एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती दरों पर आक्रोश
धरने के दूसरे दिन ममता बनर्जी का सबसे उग्र रूप रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि को लेकर दिखा। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ममता ने सवाल उठाया कि जब तीन दिन के भीतर ही गैस के दाम कई बार बढ़ा दिए जाएं, तो आम आदमी अपना बजट कैसे संभालेगा। उन्होंने ‘बुकिंग के 21 दिन बाद डिलीवरी’ वाले नियम पर भी तंज कसते हुए पूछा कि क्या लोग तब तक भूखे रहेंगे?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘बर्तन मार्च’
महंगाई के इस मुद्दे को जन-आंदोलन बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण और प्रतीकात्मक विरोध का सहारा लिया है। उन्होंने आगामी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (रविवार) के अवसर पर राज्य की महिलाओं से सड़कों पर उतरने की अपील की है। ममता ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे हाथ में खाली बर्तन, कड़ाही और कटोरी लेकर विरोध मार्च निकालें। उन्होंने इस मार्च के लिए ‘काली साड़ी’ को ड्रेस कोड के रूप में सुझाया है, जो बढ़ती महंगाई के प्रति शोक और रोष का प्रतीक होगा।
ईंधन संकट के अंतरराष्ट्रीय कारणों पर सवाल
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतों में आए उछाल पर टिप्पणी करते हुए ममता बनर्जी ने इसे केंद्र सरकार की पूर्व-नियोजन की कमी बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्थिति बिगड़ने वाली थी, तो सरकार ने पहले से बफर स्टॉक या आम जनता को राहत देने के उपाय क्यों नहीं किए? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को केवल चुनाव के समय जनता की याद आती है, लेकिन उनकी बुनियादी जरूरतों (ईंधन और भोजन) के प्रति वह संवेदनहीन बनी हुई है।
शांतिपूर्ण सत्याग्रह और भविष्य की राजनीतिक रणनीति
ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सख्त हिदायत दी है कि यह अहिंसक प्रदर्शन और नागरिक अधिकार अभियान है। उन्होंने कहा कि “विरोध की भाषा सही होनी चाहिए” और इसमें किसी भी प्रकार की अशांति के लिए स्थान नहीं है। धरने के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहती हैं कि आगामी चुनावों से पहले टीएमसी जमीन पर सक्रिय है और वह महंगाई तथा मतदाता अधिकारों जैसे जमीनी मुद्दों को छोड़ने वाली नहीं है।










