Bengal Election 2026 : ममता बनर्जी का बीजेपी पर बड़ा प्रहार, वोटर लिस्ट और NRC को लेकर दी सीधी चेतावनी

बंगाल चुनाव 2026 के करीब आते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मतदाता सूची में हो रही गड़बड़ियों को NRC की आहट बताते हुए जनता से सतर्क रहने की अपील की है। क्या ममता का यह दांव बीजेपी की चुनावी रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा?

Bengal Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 10, 2026

Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सियासी जंग अब आर-पार के मोड़ पर पहुँच गई है। उत्तर 24 परगना के तेंतुलिया में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने न केवल मतदाता सूची में हुई गड़बड़ी का मुद्दा उठाया, बल्कि बीजेपी को ‘अविश्वसनीय’ बताते हुए जनता को आगाह किया। ममता बनर्जी ने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए बाहरी राज्यों से लोगों को ला रही है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।

“सांप पर भरोसा कर सकते हैं, बीजेपी पर नहीं”

चुनावी रैली के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद सख्त लहजे में बीजेपी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “आप एक बार जहरीले सांप पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी पर कभी नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने केंद्र की सत्ता का इस्तेमाल कर देश की सभी जांच एजेंसियों और स्वायत्त संस्थानों को अपने प्रभाव में ले लिया है, जिसके कारण अब कोई भी एजेंसी तटस्थ होकर काम नहीं कर पा रही है।

असम चुनाव और ‘बाहरी’ लोगों का मुद्दा

ममता बनर्जी ने असम के हालिया चुनाव का उदाहरण देते हुए दावा किया कि बीजेपी ने वहां जीत हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश से लगभग 50,000 लोगों को एक पूरी ट्रेन में भरकर भेजा था। उन्होंने आशंका जताई कि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी इसी ‘बाहरी फॉर्मूले’ को दोहराने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का अचानक तबादला करना इसी साजिश का हिस्सा है, ताकि बाहरी लोगों और अवैध धन को राज्य में आसानी से प्रवेश दिलाया जा सके।

मतदाता सूची से 90 लाख नाम हटने का गंभीर आरोप

ममता बनर्जी ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इन 90 लाख नामों में 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुसलमान शामिल हैं। उन्होंने इसकी तुलना असम के एनआरसी (NRC) से करते हुए कहा कि वहां भी सूची से बाहर किए गए 19 लाख लोगों में से 13 लाख हिंदू थे। ममता ने कहा कि बीजेपी अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के वोट काटने की गहरी साजिश रच रही है।

“सभी 294 सीटों पर मैं ही उम्मीदवार हूँ”

कार्यकर्ताओं और जनता में जोश भरते हुए ममता बनर्जी ने एक भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता उन्हें ही राज्य की सभी 294 सीटों पर तृणमूल का एकमात्र उम्मीदवार मानें। उन्होंने स्पष्ट किया, “अगर आप मेरे नेतृत्व में फिर से सरकार देखना चाहते हैं, तो यह मत देखिए कि स्थानीय प्रत्याशी कौन है, हर सीट पर मैं ही लड़ रही हूँ।” उन्होंने विश्वास जताया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के बावजूद, जो भी वोट बचेंगे, वे तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में ही जाएंगे क्योंकि जनता का उन पर अटूट भरोसा है।

खान-पान की आजादी और प्रवासी मजदूरों पर अत्याचार

ममता बनर्जी ने बीजेपी शासित राज्यों में खान-पान की पाबंदियों का जिक्र करते हुए बंगाल की जनता को डराया। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी राज्य में आती है, तो वह लोगों के मांसाहार के विकल्पों पर रोक लगा देगी। उन्होंने दावा किया कि बिहार जैसे राज्यों में मछली खाने तक की आजादी नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया, “आप दूसरे राज्यों में बंगाल के लोगों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर ‘सोनार बांग्ला’ का वादा कैसे करते हैं? पहले वहां रहने वाले बंगालियों को सुरक्षा दीजिए, फिर सपना दिखाइये।”

निष्कर्ष: चुनावी दंगल की बढ़ती तपिश

ममता बनर्जी का यह आक्रामक अंदाज दर्शाता है कि टीएमसी इस बार ‘बाहरी बनाम भीतरी’ और ‘अस्मिता’ के मुद्दे को चुनाव का केंद्र बनाना चाहती है। मतदाता सूची से नाम हटने और एनआरसी का डर दिखाकर वे अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी इन गंभीर आरोपों का किस तरह जवाब देती है।

Read More: Vrindavan Boat Accident : वृंदावन में काल बनी यमुना की लहरें, स्टीमर डूबने से 9 की मौत, सर्च ऑपरेशन जारी