Manusmriti Controversy: एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान संसद में गरमाई सियासत, खरगे के मनुस्मृति वाले बयान पर भिड़े पक्ष-विपक्ष

राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा 'मनुस्मृति' का जिक्र करने पर भारी हंगामा हुआ। बीजेपी सांसदों और सदन के नेता जेपी नड्डा ने इसका कड़ा विरोध करते हुए बयान को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। नड्डा ने खरगे से अपनी टिप्पणियों को मूल पाठ से प्रमाणित करने को कहा।

Manusmriti Controversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 30, 2026

Manusmriti Controversy: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार, 30 जुलाई को भारी हंगामा देखने को मिला। कार्यवाही के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में अचानक ‘मनुस्मृति’ का जिक्र कर दिया, जिसके बाद सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। खरगे के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने कड़ा विरोध जताते हुए जमकर हंगामा किया। इस बीच, सभापति ने भी खरगे को टोकते हुए सीधे तौर पर सवाल किया कि आखिरकार ‘मनुस्मृति’ का इस पेपर लीक बिल से क्या सीधा संबंध या लेना-देना है?

खरगे बोले- ‘नए सिलेबस में डाली जा रही हैं मनुस्मृति की बातें’

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में अपनी बात रखते हुए दावा किया कि देश के नए शैक्षिक पाठ्यक्रम और सिलेबस में ‘मनुस्मृति’ से जुड़ी चीजों को शामिल किया जा रहा है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए खरगे ने आगे कहा कि इसमें वेद का उच्चारण करने पर जीभ काटने तक की कठोर बातें कही गई हैं और वेद मंत्र धारण करने पर शरीर को नुकसान पहुंचाने के प्रावधान लिखे गए हैं। खरगे के मुंह से जैसे ही यह बयान बाहर आया, वैसे ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हो गई।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने की टिप्पणी को सदन के रिकॉर्ड से हटाने की मांग

बीजेपी की ओर से मोर्चा संभालते हुए सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड से तुरंत हटाने की पुरजोर मांग की। नड्डा ने अपनी दलील देते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से समाज में अनावश्यक रूप से अशांति और मनमुटाव फैल सकता है। उन्होंने खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सदन में इस तरह की बातें कहकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जेपी नड्डा की दो टूक

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आगे बोलते हुए कहा, “मैं खड़गे जी से विनम्र अनुरोध करता हूं कि वे अपनी इन टिप्पणियों को संबंधित मूल पाठ से प्रमाणित करके दिखाएं।” उन्होंने कहा कि मनुस्मृति, जिसका सामान्य रूप से अनुवाद ‘मनु की संहिता’ के तौर पर किया जाता है, उसका शाब्दिक अर्थ ‘मनु के विचार’ है। यह मूल रूप से प्राचीन काल के एक ऋषि द्वारा संदर्भित ग्रंथ है, जिसकी अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही यह पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर ताजा हो गया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर यह गंभीर आरोप लगाती रही है कि वह देश की शासन व्यवस्था को भारतीय संविधान के स्थान पर मनुस्मृति के वैचारिक ढांचे के आधार पर चलाना चाहती है, जिसका सत्ता पक्ष हमेशा से खंडन करता आया है।