Raja Kans Kila : लखनऊ मलिहाबाद में राजा कंस किले पर बवाल, सुंदरकांड और नमाज पर लगी रोक

मलिहाबाद के ऐतिहासिक राजा कंस किले को लेकर अचानक ऐसा क्या बवाल खड़ा हुआ कि पुलिस को सुंदरकांड और बकरीद की नमाज दोनों पर ही पाबंदी लगानी पड़ गई? क्या है इस विवाद के पीछे का असली सच और योगी की पुलिस ने इलाके में शांति के लिए क्या उठाए कदम?

Raja Kans Kila

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 26, 2026

Raja Kans Kila :  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद अंतर्गत कसमंडी कला इलाके में स्थित ‘कंस किला’ को लेकर सांप्रदायिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक और विवादित स्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने बड़े और कड़े फैसले लिए हैं। क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कसमंडी में आगामी बकरीद की नमाज अदा करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, माहौल न बिगड़े इसलिए मंगलवार को पासी समुदाय के लोगों को विवादित स्थल पर सुंदरकांड का पाठ करने की अनुमति भी नहीं दी गई। दोनों पक्षों की ओर से बढ़ते दावों और प्रतिदावों के बाद पैदा हुए गतिरोध को शांत करने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

विवादित स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात

कसमंडी कला में स्थित इस प्राचीन स्थल पर वर्तमान में एक मकबरा और मस्जिद मौजूद है, जबकि पासी समुदाय का दावा है कि यह उनके पूर्वजों का प्राचीन किला है। मंगलवार को जब पासी समाज ने इस परिसर में सुंदरकांड का पाठ करने की घोषणा की, तो प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। किसी भी संभावित टकराव को रोकने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। मलिहाबाद पुलिस ने कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश करने वाले पासी समाज के करीब 15 प्रमुख नेताओं को सीआरपीसी के तहत नोटिस जारी किया है। पुलिस ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि महाराजा कंस के कथित किले के आसपास शांति व्यवस्था भंग हुई, तो दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लाखन आर्मी का आह्वान और पासी समाज के अध्यक्ष को किया गया नजरबंद

इस आंदोलन को धार देने में पासी समाज की ‘लाखन आर्मी’ मुख्य भूमिका निभा रही है, जिसने इस स्थल को बचाने के लिए एक बड़े अभियान का आह्वान किया था। बड़े मंगल के अवसर पर सुंदरकांड पाठ की भनक लगते ही पुलिस ने सुबह ही पासी समाज के अध्यक्ष को उनके घर पर नजरबंद कर दिया। इसके अलावा, विवादित परिसर की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी भी समर्थक या बाहरी व्यक्ति को वहां फटकने नहीं दिया जा रहा है। सुरक्षाकर्मी हर आने-जाने वाले से कड़ी पूछताछ कर रहे हैं। इसी मुस्तैदी के दौरान उन्नाव से आए दो संदिग्धों को पुलिस ने रोककर कड़ी फटकार लगाई और वापस भेज दिया। लाखन आर्मी के नेता सूरज पासी का कहना है कि यह लड़ाई उनके समाज के दबे हुए गौरवशाली इतिहास को वापस सामने लाने की है।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद का बयान

इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। लाखन आर्मी ने समाजवादी पार्टी के बड़े पासी नेताओं, जैसे अयोध्या के नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद और मोहनलालगंज के सांसद आरके चौधरी से इस मुहिम में शामिल होने और ‘कंसा किला’ को बचाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस संवेदनशील विवाद से पूरी तरह से दूरी बना ली है। उन्होंने पासी किला बनाम मस्जिद के इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक सुनियोजित राजनीतिक एजेंडा करार दिया। सपा सांसद ने स्पष्ट किया कि पासी समाज हमेशा से समाज को जोड़ने का काम करता आया है और वह किसी भी ऐसे मुद्दे का समर्थन नहीं करेगा जिससे क्षेत्र का सांप्रदायिक सौहार्द्र और शांति भंग हो।

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