महाकाल भक्तों के लिए बड़ा बदलाव! भस्म आरती में अब 3 माह में एक बार ही मिलेगा मौका

उज्जैन उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए अब श्रद्धालु तीन माह में केवल एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करवा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष

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Published On :

जून 23, 2026

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उज्जैन
उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए अब श्रद्धालु तीन माह में केवल एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करवा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष नियम नहीं था। वर्ष 2024 में भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के चलते तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का निर्णय लिया था। यह व्यवस्था कुछ समय तक लागू रही, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी।

अब एक बार फिर भस्म आरती की अनुमति को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह बाद ही दोबारा किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया है। अब जो श्रद्धालु प्रोटोकॉल या अन्य माध्यमों से हर माह भस्म आरती की अनुमति लेकर दर्शन करने आते थे, उन्हें तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति मिल सकेगी।

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसे अब और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

वर्ष 2024 में भी हुआ था नियम लागू
बता दें कि 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।

मंदिर प्रशासन ने दी सफाई
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भस्म आरती में सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिले और कुछ लोगों द्वारा बार-बार बुकिंग कर सीटें कब्जाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।

आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा
मंदिर समिति का मानना है कि नए नियम से उन भक्तों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से भस्म आरती के दर्शन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार करते हैं। अब एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार बुकिंग करने की संभावना कम होगी और अधिक श्रद्धालु इस विशेष आरती में शामिल हो सकेंगे। इससे भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी बढ़ेगी।

क्या बदला नए नियम में?
अब एक मोबाइल नंबर और एक आधार कार्ड से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति मिलेगी। यह नियम आम श्रद्धालुओं और प्रोटोकॉल श्रेणी दोनों पर समान रूप से लागू रहेगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य भस्म आरती में सभी भक्तों को समान अवसर उपलब्ध कराना और बुकिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

प्रशासक बोले – नियम नया नहीं, सिर्फ सख्ती बढ़ाई
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं हो सकेगा।

जानिए क्या बदला नियम में?
• पहले: प्रोटोकॉल से हर महीने बुकिंग संभव थी
• अब: हर मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ 1 बार बुकिंग
• लागू: आम श्रद्धालु + प्रोटोकॉल दोनों पर
• मकसद: बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक, सबको समान मौका
• आधार कार्ड: एक आधार से भी 3 महीने में 1 बार ही अनुमति

आम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत
इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब वीआईपी और बार-बार दर्शन करने वालों की मोनोपॉली टूटेगी। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  

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