
UP News: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में बेमौसम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बारिश तो थम गई है, लेकिन खेतों में भरा पानी और कीचड़ अब भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। कई जगह धान की फसल खेतों में गिर गई है। अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी तरह जल्द से जल्द फसल को समेट लिया जाए, ताकि नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सके।
दूसरी तरफ प्रशासन ने भी फसलों को हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। लेखपाल गांव-गांव पहुंचकर खेतों का सर्वे कर रहे हैं। हालांकि, किसानों को फिलहाल सरकारी मदद से ज्यादा अपनी फसल बचाने की चिंता सता रही है।
1.65 लाख हेक्टेयर में लगी धान की फसल

महाराजगंज जिले में करीब 1.65 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती की गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अब तक जिले में सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत धान की कटाई ही हो पाई है। ऐसे में बारिश के कारण फसल गिरने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।किसानों को डर है कि खेतों में पानी में डूबी धान की बालियों के दाने काले पड़ सकते हैं। इससे धान की गुणवत्ता खराब होने के साथ बाजार में उसकी कीमत भी प्रभावित हो सकती है। वहीं, कटाई में देरी होने से अगली फसल की तैयारी भी पिछड़ने लगी है।
खेतों में जलभराव से कंबाइन मशीनें बंद
आनंदनगर, नौतनवा, निचलौल, सिसवा और घुघली के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश बंद होने के बाद भी खेतों की मिट्टी में काफी नमी है और जगह-जगह कीचड़ जमा है। इस वजह से कंबाइन मशीनें खेतों में नहीं उतर पा रही हैं।किसान हाथ से धान कटवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए भी मजदूर आसानी से नहीं मिल रहे। ऐसे में खेतों में गिरी फसल को समेटना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द कटाई नहीं हुई तो पानी में भीगी बालियों के दाने खराब हो सकते हैं और उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है।
धान की कटाई में देरी से गेहूं की बुआई पर भी मंडराया संकट
किसानों की परेशानी सिर्फ धान की फसल तक सीमित नहीं है। उन्हें अब अगली फसल यानी गेहूं की बुआई की चिंता भी सताने लगी है। दरअसल, जब तक खेतों से धान की फसल नहीं हटेगी, तब तक गेहूं की बुआई के लिए खेत तैयार करना मुश्किल होगा।अगर खेतों से पानी निकलने और धान की कटाई में ज्यादा समय लगा तो गेहूं की बुआई भी देर से होगी। इसका असर आने वाली फसल की पैदावार पर पड़ सकता है।

जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है, उन्हें बीमा कंपनी के नियमों के अनुसार मुआवजा मिल सकता है। इसके अलावा तहसील प्रशासन की ओर से भी फसल को हुए नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।
लेखपाल गांव-गांव जाकर कर रहे फसल नुकसान का सर्वे
महाराजगंज प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का सर्वे शुरू करा दिया है। लेखपाल गांवों में पहुंचकर किसानों के खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं और नुकसान की जानकारी दर्ज कर रहे हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे बारिश से हुई फसल क्षति की सूचना समय पर दर्ज कराएं।
किसान इन नंबरों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- आपदा टोल फ्री नंबर: 1077
- जिला प्रशासन: 05523-222162
- हेल्पलाइन: 9621333537
- हेल्पलाइन: 9628819145
46,520 किसानों ने कराया फसल बीमा

जिले में कुल 46,520 किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया हुआ है। ऐसे बीमित किसान बारिश से हुए नुकसान की जानकारी फसल बीमा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए निर्धारित समयसीमा का ध्यान रखना जरूरी है।फिलहाल किसानों को प्रशासन और बीमा कंपनी के सर्वे का इंतजार है। एक तरफ खेतों में खड़ी और गिरी धान की फसल बचाने की जद्दोजहद है, तो दूसरी तरफ गेहूं की बुआई का समय निकलने का डर भी बना हुआ है। अब देखना होगा कि सर्वे के बाद प्रभावित किसानों को कितनी राहत मिल पाती है।











