Mahavir Jayanti 2026: मरुधरा में उड़ेगा भक्ति का गुलाल! जानिए राजस्थान में कैसे अनूठे अंदाज में मनाई जाती है महावीर जयंती

राजस्थान के कुछ जिलों में आज और कुछ में कल (31 मार्च) को महावीर जयंती का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। करौली के प्रसिद्ध 'श्री महावीरजी' धाम में मीणा और गुर्जर समाज के सामूहिक सौहार्द संग भव्य चमत्कारी रथयात्रा निकाली जाएगी, तो वहीं जयपुर और जोधपुर की सड़कें केसरिया जुलूस और प्रभात फेरियों से गूंज उठेंगी।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 30, 2026

Mahavir Jayanti 2026: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने ‘जियो और जीने दो’ का अमर संदेश दिया था। उनकी जयंती पर राजस्थान भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है। अहिंसा और अपरिग्रह का यह पर्व मरुधरा की माटी में जिस भव्यता से मनाया जाता है, वह श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

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जयपुर और जोधपुर की शोभायात्राएं

Mahavir Jayanti 2026
मरुधरा में उड़ेगा भक्ति का गुलाल!

राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह से ही प्रभात फेरियां और विशाल शोभायात्राएं निकलेंगी। जौहरी बाजार और बापू बाजार की गलियों में केसरिया ध्वजों के साथ हाथी, घोड़े और बैंड-बाजे भगवान महावीर के जयकारों से वातावरण गुंजायमान करेंगे। जोधपुर और उदयपुर के मंदिरों में भगवान का ‘108 कलशों’ से अभिषेक किया जाएगा। इस दिन जैन समाज के लोग केसरिया वस्त्र पहनकर पूजा-अर्चना करते हैं और सामूहिक भोज का आयोजन भी होता है।

करौली का श्री महावीरजी मंदिर

राजस्थान में महावीर जयंती का सबसे बड़ा केंद्र करौली जिले का श्री महावीरजी मंदिर है। गंभीर नदी के तट पर स्थित इस धाम में भगवान महावीर की अतिशयकारी प्रतिमा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की सबसे खास परंपरा विशाल रथ यात्रा है। लकड़ी के नक्काशीदार भव्य रथ में भगवान की प्रतिमा विराजमान की जाती है और श्रद्धालु मिलकर इसे खींचते हैं। इस मेले में जैन धर्मावलंबियों के साथ-साथ मीणा और गुर्जर समुदाय भी अपनी लोक विधाओं के साथ भाग लेते हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत उदाहरण है।

सेवा और जीव दया की परंपरा

महावीर जयंती केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीव दया और सेवा का संकल्प लेने का दिन भी है। प्रदेश की गौशालाओं में गायों को लापसी खिलाई जाती है और परिंडों का वितरण किया जाता है। कई जिलों में ‘अहिंसा मार्च’ निकाला जाता है, जिसमें मांसाहार त्यागने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है। जगह-जगह ठंडे पानी और शरबत की छबीलें लगाई जाती हैं, जो मरुस्थल की तपती गर्मी में सेवा का जीवंत उदाहरण पेश करती हैं।

सांस्कृतिक संध्या और प्रवचन

शाम के समय जैन मंदिरों और नसियों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। बच्चों द्वारा भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं। संतों के प्रवचनों में शांति, सद्भाव और करुणा का संदेश दिया जाता है। राजस्थान की यह पावन धरा आज भगवान महावीर के सिद्धांतों को आत्मसात कर पूरी दुनिया को प्रेम और अहिंसा का मार्ग दिखा रही है।

महावीर जयंती 2026 पर राजस्थान में भक्ति, परंपरा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। शोभायात्राओं से लेकर रथ यात्रा और सांस्कृतिक संध्याओं तक, हर आयोजन भगवान महावीर के आदर्शों को जीवंत करता है। यह पर्व न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और मानवीय करुणा का भी संदेश देता है।

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