Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने जलगांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि बीजेपी अपने ही गठबंधन सहयोगियों, यानी अजित पवार की एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में बड़ी सेंधमारी करने की योजना बना रही है। उनके इस बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब महायुति गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
अजित पवार गुट पर मंडराता खतरा: 25 विधायकों के पाला बदलने का दावा
संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की अंदरूनी कलह पर तंज कसते हुए भविष्यवाणी की है कि पार्टी जल्द ही बिखर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के लगभग 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और वे किसी भी समय कमल का दामन थाम सकते हैं। राउत के अनुसार, बीजेपी छोटे दलों को साथ लेकर अंततः उन्हें निगलने की रणनीति पर काम करती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल एनसीपी ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में भी बेचैनी है और वहां से भी कई विधायक बीजेपी में शामिल होने के लिए छटपटा रहे हैं।
एनसीपी में लेटर वॉर: सुनेत्रा पवार बनाम प्रफुल्ल पटेल
अजित पवार की पार्टी के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गया है। हाल ही में सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव आयोग को लिखे गए एक पत्र ने पार्टी के भीतर के मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। सुनेत्रा पवार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि पार्टी की ओर से पहले भेजे गए किसी भी पत्राचार या अपील पर आयोग तब तक कार्रवाई न करे जब तक वह स्वयं उसकी पुष्टि न करें। उन्होंने परोक्ष रूप से खुद को पार्टी की मुखिया के तौर पर पेश किया है। यह कदम प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन पर पार्टी के सांगठनिक ढांचे को अपने नियंत्रण में लेने के आरोप लग रहे हैं।
प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर गहराता संदेह
संजय राउत ने एनसीपी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रफुल्ल पटेल (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष) और सुनील तटकरे (प्रदेश अध्यक्ष) की भूमिका संदिग्ध होती जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये नेता पार्टी के हितों से ऊपर उठकर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। राउत का मानना है कि जिस तरह से शिवसेना और मूल एनसीपी में बगावत हुई थी, ठीक वैसा ही चक्र अब अजित पवार और शिंदे गुट के साथ दोहराया जा रहा है। उनके अनुसार, बीजेपी इन दोनों दलों के विधायकों को अपनी ओर खींचकर राज्य में अपनी एकल सत्ता स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
महाराष्ट्र की भावी राजनीति: भविष्यवाणी या जमीनी हकीकत?
संजय राउत की इस “भविष्यवाणी” को विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) की सोची-समझी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता अब दलबदल की राजनीति से ऊब चुकी है और आने वाले समय में सत्ता पक्ष के भीतर मचे इस घमासान का सीधा लाभ उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुटों को मिलेगा। हालांकि, बीजेपी और अजित पवार गुट ने इन दावों को मनगढ़ंत बताया है, लेकिन सुनेत्रा पवार के पत्र और विधायकों की संभावित नाराजगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र के सत्ता समीकरणों में सब कुछ सामान्य नहीं है।
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