Maharashtra Politics : महाराष्ट्र में मविआ के भीतर बड़ी दरार, शिवसेना (UBT) का कांग्रेस पर तीखा हमला, बताया ‘मतलबी’ साथी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच महाविकास अघाड़ी का आंतरिक कलह सतह पर आ गया है। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र और नेताओं ने कांग्रेस पर केवल अपना स्वार्थ देखने का गंभीर आरोप लगाया है। क्या यह जुबानी जंग गठबंधन के भविष्य को खतरे में डाल देगी?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 6, 2026

Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच कड़वाहट उस समय खुलकर सामने आ गई, जब शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कांग्रेस की जमकर आलोचना की गई। इस लेख में कांग्रेस को ‘कुढ़ने वाला’ और ‘मतलबी’ करार दिया गया है। गठबंधन के भीतर की यह तल्खी आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।

विधान परिषद चुनाव और शरद पवार का समर्थन

विवाद की मुख्य जड़ विधान परिषद के आगामी चुनावों को लेकर है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SCP) ने स्पष्ट किया है कि उद्धव ठाकरे जिस भी उम्मीदवार का नाम देंगे, उनका दल उसे बिना शर्त समर्थन देगा। पवार के इस रुख ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज कर दिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले (लेख में संदर्भित हर्षवर्धन सपकाल के संदर्भ में चर्चा) ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गठबंधन में चर्चा अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस वर्तमान में MVA के भीतर दूसरे नंबर की बड़ी शक्ति है।

शिवसेना का पलटवार: ‘दिल्ली जाकर पूछें सवाल’

सामना के माध्यम से शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर कड़ा कटाक्ष किया है। संपादकीय में लिखा गया है कि चर्चा होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस में चर्चा आखिर किससे की जाए? शिवसेना ने याद दिलाया कि राज्यसभा चुनावों के दौरान राज्य का कांग्रेस नेतृत्व कोई भी स्वतंत्र निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था। वे चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उनके आलाकमान ने शरद पवार की उम्मीदवारी का समर्थन किया। शिवसेना ने सलाह दी कि प्रदेश अध्यक्ष को मुंबई में नाराजगी जताने के बजाय दिल्ली जाकर अपने हाईकमान से सवाल पूछने चाहिए।

लोकसभा की सफलता और विधानसभा की खींचतान

शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली 100 सीटों और राहुल गांधी को मिले विपक्ष के नेता के पद में महाराष्ट्र की 30 सीटों का बहुत बड़ा योगदान है। MVA ने मिलकर 48 में से 30 सीटें जीती थीं, जिनमें कांग्रेस को 13 सीटें मिलीं। हालांकि, लेख में यह भी आरोप लगाया गया कि इन 13 सीटों की सफलता के अहंकार में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान जरूरत से ज्यादा खींचतान की, जिसका खामियाजा पूरे गठबंधन को भुगतना पड़ा।

क्षेत्रीय दलों को ‘बैसाखी’ न समझने की चेतावनी

अंत में, शिवसेना (UBT) ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का साथ देते रहेंगे, लेकिन कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को केवल ‘बैसाखी’ के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सामना के अनुसार, क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों के ‘लाउडस्पीकर’ होते हैं और उन्हें समान भागीदार के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। केंद्र की सत्ता की इच्छा रखने वालों को क्षेत्रीय दलों के अवसरों को लालची नजरों से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें साथ लेकर चलने की उदारता दिखानी चाहिए।

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