Magh Mela 2026: प्रयागराज में आयोजित माघ मेला में इस बार सनातनी किन्नर अखाड़े का विस्तार देखने को मिला। पहली बार मेला क्षेत्र में पट्टाभिषेक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अखाड़े के 11 संतों को विभिन्न पदों पर सम्मानित किया गया। इसमें 10 संतों को महामंडलेश्वर और एक संत को महंत का पद प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में एक पुरुष और दो महिला संत भी शामिल रहे। सबसे खास बात यह रही कि देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी दी गई।
Magh Mela 2026: लंबे बाल, काजल और लाल बिंदी, इस लड़की ने माघ मेले में लूट ली सबकी निगाहें
पट्टाभिषेक की परंपरा और दीक्षा समारोह

पट्टाभिषेक से पहले सभी संतों ने सनातनी परंपराओं और नियमों का पालन किया, जो परंपरागत रूप से 13 अखाड़ों में लागू होते हैं। पांच गुरुओं ने संतों को दीक्षा दी, जिसमें विभिन्न धार्मिक रस्में पूरी की गईं—एक गुरु ने लंगोटी दी, दूसरी ने कंठी, एक ने चोटी काटी और एक ने भस्म प्रदान किया। सभी संतों ने संगम पर पिंडदान किया और गंगा स्नान करके अपने कर्मकांडों को पूरा किया। इस दौरान आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि, जिन्हें ‘टीना मां’ भी कहा जाता है, ने सभी संतों को गुरुमंत्र देकर आध्यात्मिक शिक्षा दी।
पट्टाभिषेक में शामिल संत और उनके पद
पट्टाभिषेक में सम्मिलित संतों में दिल्ली से पूनम मां, देहरादून से नीतेश शंकर नंद गिरि, कोलकाता से अभिरूपा रंजीता, दिल्ली से पवित्रानंद गिरि, हरिद्वार किन्नर धाम से तारा, पंजाब से सोनम नंद गिरि, महाराष्ट्र से उमा पुजारी, ज्योति स्वामी, श्री गायत्री और प्रयागराज से संजना कौशल्यानंद गिरि शामिल थे। इनमें से कोलकाता की अभिरूपा रंजीता देश की पहली महिला किन्नर अधिवक्ता हैं। प्रयागराज की रानी कौशल्यानंद गिरि को महंत का पद मिला।
सामुदायिक समावेशिता और भविष्य की योजनाएं
आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि अखाड़ा समाज के प्रत्येक वर्ग और समुदाय को जोड़ने के लिए समर्पित है। संतों ने भी कहा कि आने वाले समय में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारत के लोगों को भी संत बनाने की योजना है। इस प्रकार अखाड़ा अधिक समावेशी और बहुलतावादी बनता जा रहा है।
सात महामंडलेश्वर और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति
किन्नर अखाड़े में शुक्रवार को सात महामंडलेश्वर, छह श्रीमहंत, 11 महंत और 21 कंठी चेला बनाए गए। आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सभी को गुरु मंत्र देकर दीक्षा दी और उन्हें सनातन धर्म को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी। साथ ही, आचार्य ने आने वाले कुम्भ मेलों की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया।
क्षेत्रीय संतों की नियुक्ति
अखाड़े के अध्यक्ष पद पर वैष्णव अखाड़ा के आचार्य को नामित किया गया, वहीं ओडीसा की महामंडलेश्वर स्वामी देवांशी को अध्यक्ष बनाया गया। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की पारोनंद गिरि, महाराष्ट्र की नेहानंद गिरि, ओडीसा की देवांशी नंद गिरि (रक्षा नंद गिरि), रांची की अमरजीत नंद गिरि, दिल्ली की शालूनंद गिरि और जबलपुर की साक्षीनंद गिरि को महामंडलेश्वर पद प्रदान किया गया। इसके अलावा 21 संतों को कंठी चेला और 11 को महंत का पद दिया गया।










