Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। राज्य सरकार द्वारा अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकान से कॉपी-किताबें खरीदने की आजादी और फीस नियंत्रण के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, कई नामी स्कूल लगातार नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे।
अभिभावकों की ओर से मिल रही लगातार शिकायतों का संज्ञान लेते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) विशाख जी ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला शुल्क नियामक समिति की एक हाई-प्रोफाइल बैठक में नियमों का उल्लंघन करने, अवैध रूप से फीस वसूलने और एक ही निर्धारित दुकान से किताबें खरीदने का दबाव बनाने के मामले में लखनऊ के 8 प्रतिष्ठित स्कूलों को दोषी पाया गया। डीएम ने इन सभी दोषी स्कूलों पर 5-5 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोकते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
1 जून तक देना होगा जवाब
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से राजधानी के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राकेश कुमार ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि लखनऊ जिले के कुल 20 निजी स्कूलों के खिलाफ अवैध वसूली और मनमानी की 28 गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट जब जिलाधिकारी विशाख जी के समक्ष पेश की गई, तो प्राथमिक जांच में 8 स्कूलों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और शुल्क नियामक कानून के उल्लंघन के आरोप पूरी तरह सही पाए गए। कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए इन 8 स्कूलों को 1 जून 2026 तक डीआईओएस कार्यालय में अपना लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करने का अंतिम मौका दिया गया है।
जांच के दायरे में आए दो अन्य स्कूलों ने प्रशासन को लिखित में यह आश्वासन दिया है कि उन्होंने अभिभावकों से जो भी अतिरिक्त फीस वसूली है, उसे वे आगामी महीनों की फीस में समायोजित (Adjust) कर देंगे। इस सकारात्मक रुख के बाद प्रशासन ने उन्हें फिलहाल जुर्माने से राहत दी है।
इन 8 प्रमुख स्कूलों पर गिरी प्रशासन की गाज
जिला शुल्क नियामक समिति की जांच में दोषी पाए गए और पांच-पांच लाख रुपये के जुर्माने की जद में आए लखनऊ के आठ स्कूल निम्नलिखित हैं:
एलन हाउस पब्लिक स्कूल, लखनऊ
शीलवती आइडियल पब्लिक स्कूल, रामनगर
आश्रम एकेडमी, कृष्णानगर
हुकुम सिंह मेमोरियल इंटर कॉलेज, इंदिरानगर
सेंट डॉमनिक इंटर कॉलेज, लखनऊ
सेठ एमआर जयपुरिया (गोयल कैंपस), अयोध्या रोड
ब्राइट वे इंटर कॉलेज, सेक्टर-एच, जानकीपुरम
केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल, लखनऊ
कौन हैं आईएएस विशाख जी?
इस पूरी सख्त कार्रवाई के बाद लखनऊ के वर्तमान जिलाधिकारी विशाख जी सुर्खियों में आ गए हैं। विशाख जी अय्यर 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के बेहद चर्चित आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। मूल रूप से केरल के रहने वाले विशाख जी अपनी कड़क कार्यशैली और त्वरित फैसलों के लिए जाने जाते हैं।
शैक्षणिक योग्यता: प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक (B.Tech) की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से पब्लिक पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) भी किया।
यूपीएससी में सफलता: विशाख जी ने हमेशा से ही देश सेवा के लिए प्रशासनिक लाइन में जाने का मन बनाया था। अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर ली थी और उन्हें आईपीएस (IPS) कैडर मिला था। हालांकि, उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुए।
अनुभव और साख: लखनऊ की कमान संभालने से पहले वे उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण और बड़े जिलों जैसे अलीगढ़, कानपुर नगर, भदोही, चित्रकूट और हमीरपुर में भी जिलाधिकारी (DM) के रूप में अपनी बेहतरीन सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक हलकों में विशाख जी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे भरोसेमंद और करीबी अधिकारियों में गिना जाता है।
डीएम विशाख जी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि लखनऊ की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, साफ-सुथरा और अभिभावक हितैषी बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि भविष्य में भी किसी स्कूल ने सरकारी नियमों की अनदेखी की, तो उनके खिलाफ इससे भी ज्यादा कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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