Lucknow News: लखनऊ के विभूति खंड थाना क्षेत्र में स्थित पॉश समिट बिल्डिंग में उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां चल रहे एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ। ‘सोलारिस सॉल्यूशन’ (Solaris Solution) के नाम से संचालित इस सेंटर की 11वीं मंजिल पर पुलिस ने छापा मारा। यह गैंग ‘डॉलर ऐप’ के जरिए सीधे विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस की इस दबिश के बाद शहर में अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क की पोल खुल गई है।
12 घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन
बताते चले कि, पुलिस ने इस शातिर गैंग के खिलाफ लगभग 12 घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी में दो ऑपरेशन मैनेजर समेत कुल 119 युवकों को हिरासत में लिया गया है। आरोपियों की बड़ी तादाद को देखते हुए पुलिस को मौके पर बसें बुलानी पड़ीं। हिरासत में ली गई युवतियां और युवक अपने चेहरों को छुपाते और कैमरे से बचते नजर आए। भारी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया ताकि कानूनी प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जा सके।
संदिग्धों से कड़ी पूछताछ जारी
DCP क्राइम अनिल यादव के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं को 30 से 40 हजार रुपये की मोटी सैलरी दी जाती थी। मुख्य शर्त अंग्रेजी में निपुण होना थी, ताकि विदेशी नागरिकों को आसानी से झांसे में लिया जा सके। गैंग ‘वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ (VoIP) का इस्तेमाल कर रहा था और अमेरिका में बैठे अपने साथियों के साथ मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय ठगी को अंजाम दे रहा था।
ऑपरेशंस मैनेजर और मास्टरमाइंड पर कानूनी शिकंजा
मंगलवार रात शुरू हुई यह कार्रवाई बुधवार शाम तक चली। शुरुआत में ऑपरेशंस मैनेजर ललित खैरजानी और विक्रम सिंह परमार ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर उन्होंने गिरोह के सरगनाओं के नाम उगल दिए। पुलिस अब इन मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है। कॉल सेंटर से बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ठगी की परतें पूरी तरह से खोली जा सकें।
डिजिटल धोखाधड़ी और टोल-फ्री नंबर का जाल
इस गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। इन्होंने अमेरिकी कंपनियों के टोल-फ्री नंबरों को क्लोन (डुप्लीकेट) कर इंटरनेट पर वायरल कर दिया था। जब कोई विदेशी नागरिक उन नंबरों पर कॉल करता, तो वीओआईपी सिस्टम के जरिए वह कॉल सीधे लखनऊ के इस कॉल सेंटर में ट्रांसफर हो जाती। यहाँ बैठे ठग खुद को अमेरिकी ‘एफबीआई अधिकारी’ बताकर विदेशी नागरिकों को पोर्नोग्राफी केस में जेल भेजने की धमकी देते और वसूली करते थे। लखनऊ पुलिस अब इस मामले की व्यापक जांच में जुटी है।










