Lucknow Aliganj Fire: लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनिमेशन कोचिंग सेंटर में हुई भीषण अग्निकांड ने सोनीपत के एक होनहार युवक ‘भविष्य’ की जान ले ली। यह दुखद घटना केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरा सदमा है। महज 16 दिन पहले ही भविष्य ने इस संस्थान में अपनी नई नौकरी शुरू की थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। परिवार की उम्मीदों का चिराग, जो अभी करियर की शुरुआत ही कर रहा था, इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गया।
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मां की गोद सूनी, अरमान राख
भविष्य के गांव महिपुर में मातम का माहौल है। परिजनों के अनुसार, घटना के समय भविष्य ने अपनी मां को वीडियो कॉल की थी। उस आखिरी बातचीत में उसने जो कहा, वह किसी भी मां का कलेजा चीरने के लिए काफी है। भविष्य ने रोते हुए मां से कहा था, “चारों तरफ धुआं ही धुआं है, शायद अब मैं जिंदा नहीं बचूंगा।” इसके तुरंत बाद फोन कट गया और वह आखिरी संपर्क था। भविष्य अपनी बहन की शादी के सपने देख रहा था, जिसे पूरा करने के लिए ही उसने घर से दूर यह नौकरी चुनी थी। आज वही ‘भविष्य’ परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गया है, जिससे उसके माता-पिता और बहन पूरी तरह टूट चुके हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था पर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। भविष्य के परिजनों का आरोप है कि ऐसे हादसों के बाद प्रशासन केवल खानापूर्ति करता है। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के नाम पर केवल स्थानांतरण (ट्रांसफर) या निलंबन (सस्पेंशन) किया जाता है, जो दोषियों को कड़ा संदेश नहीं देता। परिजनों ने मांग की है कि कोचिंग संस्थान चाहे प्राइवेट हो या सरकारी, अग्निशमन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भविष्य की बहन या पिता को सरकारी नौकरी दी जाए ताकि परिवार को संबल मिल सके।
मौत का आंकड़ा और जांच की स्थिति
केजीएमयू (KGMU) के प्रवक्ता प्रोफेसर के.के. सिंह के अनुसार, इस अग्निकांड में जान गंवाने वाले अधिकांश छात्रों और कर्मचारियों की मौत दम घुटने (Asphyxiation) के कारण हुई। अब तक इस हादसे में 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पुलिस ने संस्थान के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल मालिक पर कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिन्होंने इस कोचिंग सेंटर को बिना सुरक्षा मानकों की जांच किए संचालन की अनुमति दी।
भविष्य के अंतिम संस्कार के दौरान पूरा गांव गमगीन था। एक शिक्षक पिता, जो पहले ही संघर्ष कर रहे थे, आज अपने इकलौते सहारे को खोकर बेबस हैं। समाज के हर वर्ग की यही मांग है कि भविष्य जैसे होनहारों की जान लेने वाली इस प्रशासनिक लापरवाही पर न केवल सख्त कानूनी कार्रवाई हो, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध भी किए जाएं।
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