Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के लिए शनिवार की सुबह एक ऐतिहासिक अध्याय लेकर आई। दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 9 नए चीतों की खेप भारत पहुँची, जिसमें 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। इन चीतों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर लाया गया, जहाँ से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुँचाया गया। इस नई आमद के साथ ही कूनो में चीतों का कुनबा 36 से बढ़कर 45 हो गया है। यदि गांधी सागर अभयारण्य के तीन चीतों को भी जोड़ लिया जाए, तो अब पूरे देश में चीतों की कुल संख्या 48 तक पहुँच गई है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के बाद भारत का सबसे महत्वाकांक्षी वन्यजीव पुनरुद्धार कार्यक्रम है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया रिलीज: क्वारंटीन बाड़े में नई शुरुआत
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव शनिवार सुबह विशेष विमान से ग्वालियर और फिर हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुँचे। सुबह करीब 9:20 बजे उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को विशेष क्वारंटीन बाड़े में रिलीज किया। इस दौरान वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। अगले एक महीने तक इन सभी 9 चीतों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सख्त निगरानी में रखा जाएगा ताकि वे भारतीय वातावरण और जलवायु के अनुरूप खुद को ढाल सकें। उनके स्वास्थ्य और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
बेहतर लिंगानुपात और भविष्य की संभावनाएं: विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई खेप में मादा चीतों की संख्या (6 मादा) अधिक होने से कूनो नेशनल पार्क में लिंगानुपात (Sex Ratio) में काफी सुधार होगा। वर्तमान में कूनो में वयस्क चीतों की संख्या में 18 मादा और 16 नर शामिल हैं। लिंगानुपात का यह संतुलन भविष्य में प्राकृतिक प्रजनन (Natural Breeding) की संभावनाओं को और अधिक प्रबल बनाएगा। कूनो की धरती पर अब तक कई शावकों का जन्म हो चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण अफ्रीकी चीते भारतीय परिवेश को अपना चुके हैं।
जेनेटिक विविधता का नया अध्याय: नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना का संगम
जानकारों के मुताबिक, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना के चीतों के शामिल होने से कूनो में जेनेटिक विविधता (Genetic Diversity) और भी मजबूत होगी। तीन अलग-अलग देशों के चीतों का एक साथ होना इस प्रोजेक्ट की दीर्घकालिक सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। जेनेटिक विविधता से प्रजाति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उनके विलुप्त होने का खतरा कम हो जाता है। कूनो अब दुनिया का ऐसा अनूठा पार्क बन गया है जहाँ विभिन्न भौगोलिक पृष्ठभूमियों के चीते एक साथ फल-फूल रहे हैं।
जैव विविधता संरक्षण में भारत का वैश्विक नेतृत्व
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह बोत्सवाना और भारत के बीच जैव विविधता संरक्षण की एक ऐतिहासिक साझेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत में चीतों के प्रतिस्थापन (Cheetah Reintroduction) की योजना पूरी तरह से सफल रही है। उन्होंने आगे बताया कि भारत के इन प्रयासों से प्रेरित होकर अब विश्व के 97 देश जैव विविधता संरक्षण के इस मंच के सदस्य बन गए हैं। साढ़े तीन साल के छोटे से अंतराल में भारत ने चीतों को फिर से बसाकर दुनिया को संरक्षण का एक नया मॉडल दिया है।
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