UGC Roll Back News: UGC के नए नियमों पर भड़के कुमार विश्वास, पोस्ट शेयर कर की ‘रोलबैक’ की मांग

यूजीसी के नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026' पर विवाद छिड़ गया है। मशहूर कवि कुमार विश्वास ने फेसबुक पर रमेश रंजन मिश्र की कविता साझा कर सवर्णों की पीड़ा का जिक्र किया और 'UGC Rollback' की मांग की। 118% बढ़ी भेदभाव की शिकायतों के बीच आए इन नियमों को सामान्य वर्ग 'एकतरफा' और भेदभावपूर्ण बता रहा है।

UGC Roll Back News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 27, 2026

UGC Roll Back News: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए लाए गए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ पर विवाद गहराता जा रहा है। मशहूर कवि और सार्वजनिक वक्ता डॉ. कुमार विश्वास ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी से इन नियमों को तुरंत वापस लेने (Rollback) की मांग की है।

Bareilly Magistrate News: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नियमों को बताया ‘काला कानून’

कुमार विश्वास की फेसबुक पोस्ट

डॉ. कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्र की मार्मिक पंक्तियों को साझा करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने लिखा: “चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।” इन पंक्तियों के माध्यम से विश्वास ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय कर सकते हैं। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में ‘UGC Rollback’ लिखकर अपनी मांग को मजबूती से रखा है।

उच्च शिक्षा समानता नियम 2026 पर उठते गंभीर सवाल

बताते चले कि, यूजीसी के इन नए दिशा-निर्देशों पर केवल राजनेताओं ने ही नहीं, बल्कि आम जनता और शिक्षाविदों ने भी सवाल उठाए हैं। आलोचकों का तर्क है कि कानून के दायरे और उसकी स्पष्टता में कमी है। लोगों को डर है कि इन नियमों को चुनिंदा तरीके से लागू किया जा सकता है, जिससे विश्वविद्यालय परिसरों (यूनिवर्सिटी कैंपस) में शैक्षणिक माहौल बिगड़ने और छात्रों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।

शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि का यूजीसी तर्क

आपको बता दे कि, यूजीसी ने इन नियमों का बचाव करते हुए एक रिपोर्ट का हवाला दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। आयोग का कहना है कि यह नियम विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने और एक समावेशी माहौल बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

सामान्य वर्ग की चिंताएं और एकतरफा ढांचे का आरोप

नोटिफिकेशन जारी होने के बाद से ही समाज का एक वर्ग इसे ‘एकतरफा’ बता रहा है। सामान्य वर्ग के प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि प्रस्तावित ढांचे में आरोपियों के बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं दिए गए हैं। उनका मानना है कि इन कड़े प्रावधानों का दुरुपयोग सवर्ण या ऊंची जाति के छात्रों को गलत तरीके से निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे ‘रिवर्स भेदभाव’ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

संस्थागत जवाबदेही और उत्पीड़न के विरुद्ध सुधारात्मक उपाय

दूसरी ओर, सामाजिक न्याय के पैरोकारों ने इसे ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया है। समर्थकों का कहना है कि यह नियम संस्थानों के प्रमुखों (कुलपति और निदेशक) पर सीधी जिम्मेदारी डालते हैं। अब संस्थानों को उत्पीड़न की शिकायतों पर नियमित निगरानी रखनी होगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। उनके अनुसार, यह नियम किसी के खिलाफ नहीं बल्कि कैंपस को सुरक्षित बनाने के लिए हैं।

UGC New Rules: यूजीसी के फैसले पर सवालों की बौछार, विश्वविद्यालयों में छिड़ी बहस