Kishtwar Encounter: किश्तवाड़ के चतरू में महामुठभेड़, जैश के 7 खूंखार आतंकी ढेर, भारी गोला-बारूद बरामद

किश्तवाड़ के दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों के बीच छिपे जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकियों को भारतीय सेना के पैरा कमांडोज ने मिट्टी में मिला दिया। चतरू इलाके में रात भर चली इस भीषण मुठभेड़ में क्या कोई बड़ा आतंकी कमांडर भी मारा गया है? सेना के इस सर्जिकल स्ट्राइक जैसे एक्शन ने हड़कंप मचा दिया है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Kishtwar Encounter: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने लंबे समय से चल रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। White Knight Corps ने सोमवार को बताया कि ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में 326 दिनों तक चले संयुक्त ऑपरेशन में सात कुख्यात आतंकियों को मार गिराया गया। यह अभियान बेहद कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में अंजाम दिया गया, लेकिन सुरक्षाबलों ने धैर्य और रणनीति के दम पर अंततः लक्ष्य हासिल कर लिया।

सेना, पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई

इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सुरक्षा एजेंसियों ने मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार कर आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। चतरू के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकियों की मौजूदगी की सटीक जानकारी जुटाने के बाद संयुक्त बलों ने सुनियोजित तरीके से घेराबंदी की और मुठभेड़ में सभी सात आतंकियों को ढेर कर दिया।

जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे मारे गए आतंकी

सेना के मुताबिक, मारे गए सभी आतंकी पाकिस्तान समर्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे। इनमें संगठन का कुख्यात कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। सैफुल्लाह और उसके सहयोगी कई आतंकी गतिविधियों में संलिप्त बताए जा रहे थे। सुरक्षाबलों का मानना है कि इन आतंकियों के मारे जाने से क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

अत्याधुनिक तकनीक का किया गया व्यापक इस्तेमाल

इस लंबे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया। FPV ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और RPA/UAV जैसे उन्नत संसाधनों की मदद से आतंकियों की गतिविधियों और लोकेशन पर सटीक निगरानी रखी गई। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में पारंपरिक तरीकों से अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसे में तकनीकी सहायता ने ऑपरेशन को प्रभावी और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभाई।

कठोर मौसम और दुर्गम भूगोल के बीच जारी रहा अभियान

किश्तवाड़ के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में कड़ाके की ठंड, लगातार बारिश और जमा देने वाले तापमान के बावजूद सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन जारी रखा। बीते एक वर्ष के दौरान चतरू के जंगलों में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच एक दर्जन से अधिक मुठभेड़ें हुईं। संयुक्त बलों के बढ़ते दबाव के कारण आतंकी बार-बार अपनी लोकेशन बदलते रहे और किश्तवाड़ से लेकर डोडा, कठुआ और उधमपुर तक भागते रहे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।

घेराबंदी के बाद सैफुल्लाह समेत पूरी टीम का सफाया

लगातार निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर अंततः सुरक्षाबलों ने सैफुल्लाह और उसके साथियों को चतरू इलाके में घेर लिया। सटीक रणनीति और समन्वित कार्रवाई के बाद सभी सात आतंकियों को मार गिराया गया। व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि सेना और खुफिया एजेंसियों के साहस, समर्पण और दृढ़ संकल्प के सामने आतंकी नेटवर्क टिक नहीं सकता। यह कार्रवाई क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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