Kiren Rijiju Statement: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रस्तावित परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर फैल रही अफवाहों को लेकर विपक्ष पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर गलत जानकारी फैलाना न केवल जनता को भ्रमित करता है, बल्कि एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है।
विपक्ष से अफवाहें न फैलाने की अपील
किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्षी दलों से अपील की कि वे परिसीमन को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी या भ्रामक जानकारी न फैलाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करना है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को परिसीमन से जोड़कर गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण को लेकर सरकार का रुख
रिजिजू ने कहा कि यह दिन भारतीय संसदीय इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी राजनीतिक दल इस ऐतिहासिक प्रस्ताव का समर्थन करेंगे और इसे किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनने देंगे।
परिसीमन और संवैधानिक प्रक्रिया का विवरण
सरकार की योजना के अनुसार, यह संवैधानिक संशोधन बिल 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन से जुड़ा है। परिसीमन का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की संरचना और सीटों के पुनर्निर्धारण को सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के तहत संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के आकार में बदलाव किया जा सकता है, जिससे प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित हो सके।
विपक्ष का विरोध और राजनीतिक विवाद
इस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष लगातार आपत्ति जता रहा है। उनका कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण को जोड़कर एक जटिल राजनीतिक स्थिति बनाई जा रही है। विपक्ष ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की समयसीमा पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ दलों का यह भी मानना है कि सरकार जल्दबाजी में महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव करने की कोशिश कर रही है।
सरकार की भविष्य की योजना
सरकार का लक्ष्य है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ में आवश्यक संशोधन कर महिला आरक्षण को लागू किया जाए। इसके साथ ही परिसीमन प्रक्रिया को 2027 की जनगणना से अलग रखते हुए आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर लगभग 850 करने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें अधिकांश सीटें राज्यों और शेष केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।
विशेष संसद सत्र और निष्कर्ष
सरकार ने इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए 16 से 18 अप्रैल तक विशेष संसद सत्र बुलाया है। इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण बन गया है, जहां एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर कई सवाल उठा रहा है।









