Kiren Rijiju Attack: संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन दलों ने अतीत में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था। उनके बयान के बाद सदन में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में बोलते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस, भाकपा और समाजवादी पार्टी का रुख हमेशा भगवान राम और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर विरोध का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए और मंदिर निर्माण प्रक्रिया का भी विरोध किया। रिजिजू ने यह भी कहा कि जब राम मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा था, तब विपक्ष के कुछ नेताओं ने विरोध दर्ज कराने के लिए काली पट्टी पहनकर प्रदर्शन किया था। उनके अनुसार संसद परिसर में किया गया यह विरोध अनुचित था और इससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुईं।
‘संसद परिसर में हुआ प्रदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण’
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संसद परिसर में विपक्ष द्वारा किया गया विरोध केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इससे देशभर के लोगों में गलत संदेश गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं माना जा सकता। रिजिजू ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष इस पूरे घटनाक्रम से दुखी है और उनका मानना है कि संसद के भीतर सभी दलों को संवेदनशील धार्मिक विषयों पर संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
विपक्ष से सार्वजनिक माफी की मांग
रिजिजू ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाकपा से सार्वजनिक रूप से देश और भगवान राम के प्रति कथित अपमान के लिए माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष ने किसी भी प्रकार से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो उसे स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया जब मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा था और कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई अहम बैठक
इसी बीच संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के प्रयास भी जारी रहे। समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के अनुसार बुधवार को संसद परिसर में सरकार और विपक्ष के नेताओं के बीच परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर चर्चा हुई। इस सिलसिले में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बताया गया कि बैठक का उद्देश्य परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की राय जानना और संसद में जारी गतिरोध को कम करने की संभावनाओं पर विचार करना था।
करीब 50 मिनट चली चर्चा
सूत्रों के मुताबिक यह बैठक राहुल गांधी के कक्ष में हुई और लगभग 50 मिनट तक चली। इस दौरान परिसीमन विधेयक सहित संसद में लंबित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से विपक्ष के रुख को समझने का प्रयास किया गया। हालांकि बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से किसी सहमति या निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।
मानसून सत्र में जारी है राजनीतिक तनातनी
संसद के मौजूदा मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर सरकार विभिन्न विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है। राम मंदिर से जुड़ी टिप्पणियां और परिसीमन विधेयक पर हुई बातचीत ने सत्र की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इन विषयों पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
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