Nitin Gadkari Petition : नितिन गडकरी याचिका पर हाई कोर्ट सख्त, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश जारी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की याचिका पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर किए गए विवादित पोस्ट को लेकर अदालत ने कार्रवाई की। आखिर मामला क्या था और कोर्ट ने किन आधारों पर यह आदेश जारी किया, जानिए पूरी खबर।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 5, 2026

Nitin Gadkari Petition : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित मानहानिकारक सामग्री को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मेटा, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और गूगल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया कि याचिका में उल्लेखित आपत्तिजनक पोस्ट को तत्काल हटाया जाए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री प्रथम दृष्टया अपमानजनक, अश्लील और मानहानिकारक प्रतीत होती है तथा ऐसी पोस्ट के लिए इंटरनेट पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

अदालत ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अदालत के अनुसार, तकनीकी रूप से सक्षम कंपनियों को ऐसे तंत्र विकसित करने चाहिए, जिनकी मदद से स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री की पहचान कर उसे समय रहते हटाया जा सके। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि इस प्रकार की सामग्री का प्रभाव युवाओं और आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है।

जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने की। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि संबंधित पोस्ट देखने में ही अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक प्रतीत होती हैं। अदालत ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सवाल किया कि जब उनके पास अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो क्या उनके पास ऐसा कोई प्रभावी सिस्टम नहीं होना चाहिए जो इस तरह की सामग्री की स्वतः पहचान कर सके। अदालत ने संकेत दिया कि तकनीकी संसाधनों का उपयोग केवल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाए रखने के लिए भी होना चाहिए।

भविष्य में शिकायत मिलते ही कार्रवाई करने के निर्देश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की मानहानिकारक या आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित होती है, तो संबंधित व्यक्ति सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर सकता है। इसके बाद प्लेटफॉर्म को उचित प्रक्रिया के तहत उस सामग्री की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल मंचों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे लोगों को हर बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता न पड़े और स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक सामग्री का शीघ्र निस्तारण हो सके।

चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल संबंधित पोस्ट हटाने के निर्देश जारी किए और अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की। इस दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से अपेक्षा की गई है कि वे अदालत के निर्देशों का पालन करें और भविष्य के लिए ऐसी सामग्री की निगरानी संबंधी व्यवस्था पर भी विचार करें। अगली सुनवाई में अदालत इस मामले में आगे की प्रगति और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर विचार करेगी।

एथनॉल नीति से जुड़े पोस्ट को लेकर दायर की गई थी याचिका

यह मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एथनॉल नीति को लेकर उनके संबंध में कथित रूप से भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट प्रकाशित की गईं। गडकरी ने इन पोस्ट के कारण अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का दावा करते हुए मेटा, गूगल और एक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कथित मानहानि के लिए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में कहा गया है कि कुछ पोस्ट में एथनॉल नीति के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया और यह आरोप लगाया गया कि इस नीति से उन्हें तथा उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। याचिका के अनुसार ये दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम और E20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि इस प्रकार की कथित भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

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